आकलन का समय

12_05_2015-12career1aइस समय आपके मन में कई तरह के अरमानों के लड्डू फूट रहे होंगे। कभी इंजीनियर बनने का सपना आ रहा होगा, तो कभी डॉक्टर या आइएएस-आइपीएस बनने का। कुछ तो धरती पर रहते हुए पॉयलट बन आसमान में उड़ने का ख्वाब देख रहे होंगे…। उम्र और एजुकेशन के इस मोड़ पर मन में इस तरह के ख्याल आना स्वाभाविक है, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि आप भविष्य में जो बनने की सोच रहे हैं, उसके अनुरूप काबिलियत भी रखते हैं या नहीं? कामयाब करियर के सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सपनों के सफर पर आगे बढ़ने से पहले उसके मानदंडों पर खुद को अच्छीे तरह आंक भी लें। उसी तरफ कदम बढ़ाएं, जिधर आपकी रुचि हो और जिसके लिए आप बुनियादी योग्यताएं रखते हों। क्यों जरूरी है ऐसा आकलन, बता रहे हैं अरुण श्रीवास्तव…
रश्मि को बचपन से आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचने में बड़ा मजा आता था। कुछ बड़ी होने पर उसकी रेखाओं में तस्वीरें उभरने लगीं। धीरे-धीरे वह लोगों को देखकर उनकी तस्वीरें कागज पर उकेरने लगी। एक समय तो ऐसा भी आ गया, जब वह किसी की भी हूबहू तस्वीर मिनटों में बना देती थी। एक्चुअल तस्वीर बनाने के साथ-साथ वह व्यंग्यात्मक चित्र भी बनाने लगी। उसकी इस प्रतिभा को देखते हुए उसके माता-पिता ने जब उसे इसी फील्ड में आगे बढ़ाने और पढ़ाने का निश्चय किया, तो रश्मि के मन की मुराद पूरी हो गई। फाइन आर्ट में ग्रेजुएशन और पीजी करने तक उसकी बनाई तस्वीरों और व्यंग्य चित्रों का अच्छा-खासा संग्रह तैयार हो गया। शहर की कुछ बड़ी कला प्रदर्शनियों में भी इन्हें शामिल किया गया, जहां उन्हें काफी प्रशंसा और पुरस्कार मिले। पढ़ाई पूरी करते ही उसे एक प्रतिष्ठित मैगजीन में अच्छे पैकेज पर आर्ट एग्जीक्यूटिव की जॉब मिल गई। वह जॉब के साथ-साथ अपने नायाब चित्रों के साथ कला प्रदर्शनियों में भी नियमित तौर पर भाग लेती है।
एक दूसरा उदाहरण प्रणव का है, जो बारहवीं तक पहुंचने के बाद भी पूरी तरह से कन्फ्यूज था। कभी तो उसे सब कुछ अच्छा लगता था और कभी कुछ भी नहीं भाता था। उसके माता-पिता भी समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर उसे आगे किस स्ट्रीम में पढ़ाया जाए, जिससे उसका फ्यूचर बेहतर हो सके? चूंकि पास-पड़ोस के परिवारों और कई रिश्तेदारों के बच्चे इंजीनियरिंग कर रहे थे, इसलिए वे भी प्रणव को इंजीनियर बनाने का ख्वाब देखने लगे। लेकिन उनके मन के किसी कोने में इस बात को लेकर शंका भी थी। आखिरकार काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने एक वरिष्ठ काउंसलर से अपनी दुविधा शेयर करते हुए सलाह मांगी। चूंकि काउंसलर किसी और शहर में थे, इसलिए उन्होंने पैरेंट्स को सुझाव दिया कि वे एक-दो सप्ताह तक अपने बच्चे को बताए बिना उसकी गतिविधियों का बारीकी से अवलोकन करें। दो सप्ताह बाद उन्होंने काउंसलर को फोन लगाया और हताश होकर कहा कि उन्हें तो उसकी गतिविधियों में कुछ खास नहीं लगा। काउंसलर ने जब उन्हें काफी कुरेदा और पूछा कि इस दौरान उसने कोई काम तो काफी मन से किया होगा, तब उन्होंने बताया कि हां, उसे तरह-तरह का नाश्ता पसंद है। इसके लिए वह मां से जिद कर खुद किचन में चला जाता है और अपने साथ-साथ घर के अन्य सदस्यों के लिए भी स्वादिष्ट नाश्ता बनाता है। काउंसलर को क्लू मिल गया। उन्होंने पैरेंट्स को इस पर और गौर करने को कहा। आखिर में यही निष्कर्ष निकला कि प्रणव की दिलचस्पी कुकिंग में है। ऐसे में अगर उसे इसी फील्ड में किसी अच्छे संस्थान से पढ़ाया जाए, तो आगे चलकर वह एक बेहतर शेफ बन सकता है। पहले तो माता-पिता को यह बात हजम नहीं हुई। उन्होंने आपत्ति करते हुए कहा कि उनका बेटा हलवाई तो हरगिज नहीं बनेगा, लेकिन जब काउंसलर ने उन्हेंं इस बात से कनविंस किया कि आज के समय में होटल, रेस्टोरेंट्स, रिजॉट्र्स, हॉस्पिटैलिटी सेंटर्स आदि में हलवाई नहीं शेफ होते हैं, जिनके लिए पैसे और नाम कमाने के खूब मौके होते हैं, तब कहीं जाकर वे अपने बेटे को इस लाइन में आगे बढ़ाने के लिए तैयार हुए।
सपने को बनाएं हकीकत
अपने जीवन में कामयाबी के लिए हर किसी को सपने जरूर देखने चाहिए। हां, यह जरूर है कि ये सपने अपनी योग्यता-काबिलियत को ध्यान में रखकर ही देखें, ताकि आप उन्हें हासिल करने का सफल प्रयास कर सकें। इसके लिए देश और दुनिया के कामयाब लोगों की बायोग्राफी पढ़ें। उनसे प्रेरणा लें। अपनी रुचियों-पसंद के अनुसार ही अपनी मंजिल तय करें। अगर दुविधा है, तो इसे जानने के लिए अपनी दिनचर्या-गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन करें। फिर भी कुछ समझ में न आए, तो पैरेंट्स, टीचर या काउंसलर की सलाह लें।
…ताकि खुश रहे बच्चा
न तो बच्चे किसी की नकल करें और न ही मां-बाप उन पर ऐसा करने के लिए दबाव डालें। अगर आप ऐसा करते हैं, तो यह तय मानिए कि इससे आपका बच्चा आगे खुश नहीं रह सकेगा। आप तो शुरू से यही चाहते रहे हैं न कि आपका बच्चा हर हाल में खुश रहे, फिर क्यों आप ही उसकी खुशी को खाक में मिलाना चाहते हैं। आपका यह कहना और सोचना सही है कि आप यह सब तो उसके भले के लिए ही कर रहे हैं, लेकिन जरा सोचें। उस पर अपनी या समाज की मर्जी थोप कर उसे किस दलदल में धकेलना चाहते हैं? आप खुद सोचें, क्या इस थोपे हुए करियर में वह खुश रह सकेगा? अगर वह आपके कहे मुताबिक पढ़ाई और पेशा चुन भी लेता है और जब वह उस फील्ड में पांच-दस साल बाद मन न लगने पर बोर और परेशान होने लगेगा, तब क्या उसके सामने वापसी का कोई और विकल्प होगा? शायद नहीं। उस समय उसे मन मारकर और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए उसी फील्ड में कुढ़-कुढ़ कर रहने को मजबूर होना पड़ेगा।
मन के काम में ही तरक्की
अगर हम बच्चे की रुचियों को अच्छी तरह समझने के बाद उसकी पसंद के मुताबिक रास्ता चुनते हैं, तो उस क्षेत्र में उसकी कामयाबी की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाती हैं। मन का काम होने के कारण वह उसे पूरी तरह एंज्वॉय करते हुए दिन-प्रतिदिन तरक्की की सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है। जाहिर है उसकी इस कामयाबी को देख कर आपका सीना भी खुशी और गर्व से जरूर चौड़ा होगा।
ग्रूमिंग भी जरूरी
बच्चे की पसंद और उसकी योग्यता के मुताबिक जो भी फील्ड चुनें, उसमें उसे भाग्य भरोसे छोड़ने के बजाय आज के वक्त के हिसाब से तराशने का पूरा प्रयास करें। समय से उसके करियर को समुचित आकार देने का प्रयास करेंगे, तभी वह मुकम्मल मुकाम हासिल कर सकेगा। इसके लिए उसे किसी अच्छे संस्थान से सही एजुकेशन और ट्रेनिंग उपलब्ध कराना होगा।
* दूसरों की नकल करते हुए बच्चे पर अपनी पसंद जबर्दस्ती थोपने की गलती न करें।
* बच्चे की रुचियों और उसकी क्षमता का सही-सही आकलन करते हुए ही उसकी दिशा तय करें।
* आगे पढ़ाई और करियर की दिशा न सूझे, तो टीचर्स या काउंसलर की सलाह जरूर लें।
* पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलने पर ही बच्चा अपने टैलेंट को पूरी तरह से सामने ला सकता है।

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