इनके लिए आपदा लाई ‘बहार’

रशासन जहां एक ओर आपदा से बचाव और राहत में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर अपर यमुना वन प्रभाग के ऊपरी हिमालय क्षेत्र में तस्कर वन उपज खोदने में लगे हैं। खुले आम वन उपज की अवैज्ञानिक तरीके से विदोहन हो रहा है।

खुलेआम ‌किया जा रहा विदोहन
सूत्रों से जानकारी मिली है कि बडियार क्षेत्र के साथ ही गीठ पट्टी के ऊपरी हिमालय बुग्यालों में सुना पड़े मठियाठा, वालाथाच, डोडीताल रूट पर घिनाडा, पनडोबलू, खार्सू आदि बुग्याल में यात्रा सीजन के दौरान से अवैध रूप से सतुवा तथा शंखजड़ी का खुलेआम विदोहन किया जा रहा था।

इस बीच 15 व 16 जून को आई आपदा से तस्करी और अधिक बढ़ गई है। वन अधिकारियों के आपदा कार्यों में व्यस्त होने से यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की शह पर तस्कर जड़ी-बूटियों को विदोहन कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार में गांवों की महिलाएं भी हाथ बटा रही है।

पिछले वर्ष भी हुई थी तस्‍करी
पिछले वर्ष पुरोला क्षेत्र में पकड़ी गई शंखजड़ी का अधिकांश हिस्सा इसी क्षेत्र से तस्करी होकर जंगलों से गया था। वन उपज के इस गोरख धंधे से जुड़े लोगों का यह आलम है कि वह ग्रामीणों से वन विभाग के छापे का खौप दिखा कर औने पौन दामों पर शंखजड़ी एकत्रित कर स्वयं उच्च दामों में बाहर ले जाकर बेच आते हैं।

इस सीजन में रानाचट्टी में शंखजड़ी पकडने का मामला भी प्रकाश में आया था तो वन कर्मियों ने इसे रफा दफा कर दिया था।

एक सप्ताह पहले क्षेत्र में जड़ी-बूटियों के तस्करी की शिकायत मिली थी। मैंने तत्काल वन क्षेत्राधिकारी कुथनौर के नेतृत्व टीम बनाकर भेजी थी। फिलहाल मैं आपदा के कार्यों में व्यस्त हूं। जड़ी-बूटी तस्करों पर विभाग नजर रखे हुए है।
– बृजमोहन डोबरियाल, उप प्रभागीय वनाधिकारी

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