कायाकल्प एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज का?

19_05_2015-19job1aदेश के लगभग हर जिले में स्थित रोजगार कार्यालय युवाओं को उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख जरिया बन सकते हैं, लेकिन यह विडंबना ही है कि इस मामले में एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज अपनी भूमिका का बखूबी निर्वाह नहीं कर सके हैं। केंद्र सरकार द्वारा अब इन्हें करियर सेंटर के नये कलेवर में पेश करने की तैयारी से क्या ये रोजगार कार्यालय सही मायने में अपनी उपयोगिता साबित कर सकेंगे? कहीं यह कदम भी शगूफा तो बनकर नहीं रह जाएगा। रोजगार कार्यालयों को कैसे अधिक सक्षम और उपयोगी बनाया जा सकता है, बता रहे हैं अरुण श्रीवास्तव…

क्या आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि स्मार्टफोन का इस्तोमाल करने वाले आज के युवाओं में से कितनों की दिलचस्पी जिला रोजगार कार्यालय, यानी एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंज में जाकर रजिस्ट्रेशन कराने की होती है? आज के समय में आप शायद ही ऐसे सक्षम युवाओं की तलाश कर सकें, जिनमें इनके प्रति क्रेज हो। कारण। इन सेवायोजन कार्यालयों का आज के दौर में काफी हद तक अनुपयोगी हो जाना है। इस बात को महसूस करते हुए सरकार इनके कलेवर और कामकाज के तरीके में जरूरी बदलाव लाना चाहती है, ताकि ये युवाओं के लिए उपयोगी भूमिका निभाने के अपने कर्तव्य को भली-भांति निभाते हुए उन्हेें अपनी ओर आकृष्ट कर सकें। एक समय था, जब इन केंद्रों में पंजीकरण के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगती थीं। हालांकि तब भी इन कार्यालयों द्वारा रोजगार उपलब्ध कराने की संख्या कोई खास उल्लेखनीय नहीं कही जा सकती।

ई-एक्स बनाम करियर सेंटर

केंद्र की मोदी सरकार इन सेवायोजन कार्यालयों को महत्वपूर्ण मानते हुए इनके कायाकल्प की दिशा में कदम उठाना चाहती है। इसके लिए सबसे पहले इनके कलेवर को बदलकर इन्हें करियर सेंटर्स के रूप में तब्दील करने का प्रस्ताव है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया की अपनी यात्रा के दौरान देश के जिन युवाओं को गर्व के साथ देश की ताकत बताते नहीं अघाते, उन युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इन एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंजों को सक्रिय व उपयोगी भूमिका में लाया जाना बेहद जरूरी है। इन्हें एक बहुउपयोगी करियर सेंटर में तब्दील करने के लिए कई तरह के उपाय किए जाने की जरूरत है।

वक्त की जरूरत

आज के युवा अपने लिए उपयुक्त रोजगार को लेकर सबसे ज्यादा परेशान और दुविधाग्रस्त होते हैं। खासकर छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में प्राय: उनके मार्गदर्शन और मदद के लिए कोई नहीं होता। ऐसे में जिला सेवायोजन केंद्र उनके भविष्य को संवारने के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन इसके लिए इन केंद्रों में आमूल-चूल बदलाव लाना होगा। साथ ही, यहां काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को देश के युवाओं के प्रति अपने सरोकारों को समझ कर पूरे सहयोगी भाव से उनकी सहायता के लिए तत्पर रहना होगा। उन्हें यह मानकर पूरी रुचि व निष्ठा से काम करना होगा कि एक तरह से यह उनके बच्चे के भविष्य का ही सवाल है।

इंफॉर्मेशन ऑनलाइन

इस दिशा में सबसे पहले तो देश के सभी रोजगार कार्यालयों को पूरी तरह से ऑनलाइन किए जाने की जरूरत है, ताकि सभी सरकारी विभागों के छोटे-बड़े सभी रिक्त पदों और उनके लिए आवश्यक योग्यताओं की जानकारी इसके पोर्टल/वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाए। इसे नियमित रूप से अपडेट भी किया जाए, अन्यथा डेट निकलने के बाद भी वैकेंसी के बने रहने पर उसका कोई महत्व नहीं रह जाएगा। इसके अलावा, केंद्रीय रोजगार कार्यालय और देश के सभी जिला रोजगार कार्यालयों को एक-दूसरे से ऑनलाइन जोड़ा जाना चाहिए, जिससे कि रोजगार संबंधी सूचनाएं साझा की जा सकें। इससे एक फायदा यह भी होगा कि पात्र अभ्यर्थियों को जरूरत के अनुसार देश के किसी भी कोने में भेजा जा सकेगा।

घर बैठे रजिस्ट्रेशन

आज के समय में जब पासपोर्ट से लेकर रेलवे टिकट तक घर बैठे ऑनलाइन उपलब्ध हो जा रहा है, ऐसे में रोजगार कार्यालय में रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी निश्चित रूप से ऑनलाइन उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे हर युवा इन केंद्रों से जुड़ने के लिए प्रेरित होगा। सेवायोजन केंद्रों का कायाकल्प कुछ इस तरह करना होगा कि सिर्फ किसी कैंडिडेट का पंजीकरण करके ही अपने कर्तव्य की इतिश्री न समझ ली जाए, वरन तत्परता के साथ उसे उसके प्रोफाइल और योग्यता के मुताबिक उपयुक्त रोजगार से अवगत भी कराया जाए।

कॉलेज-यूनिवर्सिटी से टाइ-अप

रोजगार कार्यालयों की एक इकाई कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में भी गठित की जा सकती है, जिसके जरिए वहां से पासआउट होने वाले स्टूडेंट्स का ऑटो-मोड में पंजीकरण हो जाए और भविष्य में उनके अनुकूल रोजगार की उपलब्धता सामने आने पर उन्हें ईमेल या फोन से अविलंब सूचित किया जाए। ऐप के जरिए ऑटो-एलर्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा सकती है, ताकि ऐसा एलर्ट मिलने पर वह युवा पोर्टल या साइट पर जाकर अपने अनुरूप रोजगार देख और अप्लाई कर सके।

ट्रेनिंग वर्कशॉप्स

जिन क्षेत्रों में ज्यादा रोजगार सृजित हो रहे हों, उनके प्रति ज्यादा से ज्यादा युवाओं को जागरूक करने और स्किल डेवलप करने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण वर्कशॉप्स भी आयोजित किए जाने चाहिए। इनमें अधिक से अधिक युवाओं को भाग लेने के लिए अभियान चलाया जाए। इन वर्कशॉप्स में संबंधित क्षेत्र या इंडस्ट्री के एक्सपट्र्स बुलाए जाएं, जो युवाओं को यह बताएं कि इंडस्ट्री को उनसे किस तरह की स्किल की उम्मीद है और वे ऐसी स्किल को कैसे हासिल कर सकते हैं। हो सके, तो समय-समय पर युवाओं को इंडस्ट्री की विजिट भी कराई जाए।

इंडस्ट्री इंटरैक्शन

बदलते वक्त के अनुसार कुछ और कदम भी उठाये जा सकते हैं। सेवायोजन केंद्रों के जरिए अब तक सिर्फ सरकारी नौकरियों के बारे में ही सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता रहा है। लेकिन अब जबकि निजी क्षेत्र की कंपनियों का प्रसार होने से काबिल लोगों की लगातार जरूरत महसूस हो रही है। इसे देखते हुए सेवायोजन कार्यालयों द्वारा प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों के साथ भी टाइ-अप किया जाना चाहिए। इससे निजी कंपनियों में उपलब्ध तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों के लिए सक्षम पंजीकृत युवाओं को वहां नियुक्ति के लिए अनुशंसित किया जा सकेगा।

न हों बंदिशें

सेवायोजन केंद्रों (या प्रस्तावित करियर सेंटर्स) को अपने अब तक के रस्मी रोल से पूरी तरह बाहर आने की जरूरत है। चूंकि ऐसे केंद्रों का जाल पूरे देश में फैला हुआ है, इसलिए संसाधनों पर ज्यादा खर्च करने की बजाय इन्हें सिर्फ एक्टिव मोड में डालने की जरूरत है। ऑनलाइन करने के साथ-साथ इन केंद्रों के कामकाज पर निगरानी रखने वाले तंत्र को भी मजबूत करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि रोजगार केंद्र और इसके कर्मचारी अपने कर्तव्य को पूरी सजगता के साथ अंजाम दे सकें। मेक इन इंडिया के वर्तमान दौर में इन केंद्रों को सक्रिय करके युवा हाथों को मजबूत बनाने के साथ-साथ देश को भी मजबूती की राह पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
* पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम के जरिए एम्प्लॉयमेंट एक्सचेंजों को उपयोगी और व्यावहारिक बनाया जा सकता है।
* सिर्फ सूचना उपलब्ध कराने की बजाय ये केंद्र सक्षम युवाओं को उनके अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी ज्यादा सक्रिय हों।
* रोजगार उपलब्धता के लिए निजी सेक्टर की कंपनियों के साथ भी टाइ-अप किया जा सकता है।

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