क्या मोदी राज में बाबा रामदेव के खिलाफ बंद होगा अहम मामला?

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modi-ramdev-12-55661ee769a0f_exlstप्रवर्तन निदेशालय योग गुरु बाबा रामदेव के खिलाफ विदेशी मुद्रा के कथित उल्लंघन से जुड़ा मामला बंद कर सकता है। रामदेव और उनके हरिद्वार स्थित ट्रस्ट के खिलाफ कुछ साल पहले यह जांच शुरू की गई थी लेकिन अब उन्हें पर्याप्त सबूतों के अभाव में राहत दी जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं कर पाया। यह मामला स्कॉटलैंड में एक द्वीप की खरीद से जुड़ा है। एजेंसी इसके वित्तीय लिंक का कोई साक्ष्य नहीं खोज पाई। बताया जाता है कि एक जोड़े ने रामदेव को बतौर ‘उपहार’ यह द्वीप दिया था। यह जोड़ा योग गुरु का फालोअर है।

लिटिल कंब्रे द्वीप स्कॉटलैंड के लार्गस का फिशिंग टाउन है। यह रामदेव का ओवरसीज बेस और स्वास्थ्य केंद्र है। कुछ ऐसी ही संपत्तियां मेडागास्कर, अफ्रीका में भी हैं, जिनकी जांच की गई थी। ईडी ने इन देशों में अपनी समकक्ष एजेंसियों से जांच में मदद करने के लिए आधिकारिक तौर पर संपर्क साधा था।

ईडी की ओर से ब्रिटेन के अधिकारियों और कुछ अन्य जगहों से मदद मांगी गई थी ताकि इस द्वीप के वित्तीय लेनदेन से जुड़े हर पहलू की जानकारी जुटाई जा सके। इसके बाद रिजर्व बैंक की रिपोर्ट और रामदेव द्वारा चलाए जा रहे ट्रस्ट द्वारा कथित तौर पर ‘संदिग्ध’ वित्तीय लेनदेन करने संबंधी इनपुट मिलने के बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत एक मामला दर्ज किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, ब्रिटिश अधिकारियों और दूसरे चैनलों द्वारा जुटाए गए साक्ष्य मामले को आगे ले जाने के लिए ‘अपर्याप्त’ हैं और मामले को जल्द बंद किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ‘द्वीप के अधिग्रहण से जुड़े कुछ और साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है। इस संबंध में तस्वीर साफ होने के बाद ही मामले के भविष्य पर कोई फैसला लिया जाएगा।’

इस जांच का मकसद बाबा रामदेव के हरिद्वार स्थित विभिन्न ट्रस्टों, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से हुए धन के प्रवाह और लेनदेन की पड़ताल करना था। इससे पहले भी, ईडी ने रामदेव के करीबी सहयोगी बालकृष्ण के खिलाफ चल रही मनी लांड्रिंग के एक मामले की जांच सबूतों के अभाव में पिछले साल बंद कर दी थी।

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