गंगा क्षेत्र में खनन जारी

15_05_2015-14hrp2-c-3हरिद्वार: जनपद में खनन को लेकर चल रहे विवाद के बीच गंगा क्षेत्रों में अवैध खनन जारी है। अप्रैल में फिर खनन पट्टे खुलने के बाद उपखनिज पट्टों के बजाय गंगा क्षेत्र से निकाले जा रहे हैं। विशनपुर-भोगपुर के साथ टाटवाला में भी अवैध खनन हो रहा है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की एक कमेटी ने इस साल गंगा क्षेत्र के खनन पट्टों का निरीक्षण करने के बाद रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि गंगा में ऊपर से बहकर कोई पत्थर नहीं आता है। बालू आदि कितना आता है, उसे किस मात्रा में निकाला जाए, इसको लेकर विस्तृत जांच की संस्तुति की गई थी। मार्च में आई इस रिपोर्ट पर तो कुछ नहीं हुआ। बल्कि गंगा क्षेत्र में खनन पट्टे खुलने व बंद होने का सिलसिला तेज हो गया। चौबीस अप्रैल से फिर खनन पट्टे खोले गए हैं। उसके बाद पट्टों की आड़ में अवैध खनन शुरू हुआ है। फिलहाल खनन का विरोध करने वालों व प्रशासन का सारा फोकस बैरागी कैंप में उपखनिज उठाने को लेकर चल रहे विवाद पर है। इसलिए विशनपुर व भोगपुर क्षेत्र में खनन पट्टों की आड़ में हो रहे अवैध खनन को नहीं देखा जा रहा है। लेकिन इस क्षेत्र में गंगा किनारों पर ही खनन हो रहा है। गंगा में दिन भर दौड़ती खनन भरी ट्रैक्टर-ट्रालियां आसानी से नजर आ जाती है। श्यामपुर के टाटवाला में भी ऐसी स्थिति है। एसडीएम सदर बीर ¨सह बुदियाल ने बताया कि विशनपुर-भोगपुर क्षेत्र को लेकर शिकायत नहीं आई है। टाटवाला में भी एक पट्टा है, उसको लेकर शिकायत आई थी। इसकी जांच को कहा गया है।
अंतिम समय में माल निकालने की होड़
मई व जून के शुरूआती पखवाड़े में खनन को लेकर विवाद हमेशा से रहा है। तीस जून तक खनन पट्टे हर हाल में मानसून को देखते हुए बंद कर दिए जाते हैं। आमतौर पर पंद्रह से तीस जून के बीच पट्टे बंद होते रहे हैं। इसलिए अंतिम समय में अधिक से अधिक उपखनिज निकालने की होड़ रहती है। इससे विवाद बढ़ता है। मानसून आने के साथ ही खनन का विवाद भी शांत हो जाता है।

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