दिल्लीः ‘आप’ विधायकों का रुतबा बढ़ा, भाजपा खफा

14_03_2015-walkejri15नई दिल्ली। दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया है। दिल्ली में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में संसदीय सचिव बनाए गए हैं। इसे लेकर सरकार की आलोचना भी हो रही है।
विपक्ष का कहना है कि सरकार के इस निर्णय से सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा तथा इससे गलत परंपरा की शुरुआत होगी। भाजपा ने इसे आप में चल रही अंदरूनी लड़ाई का नतीजा बताया है। उसका कहना है कि विधायकों को अपने साथ रखने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह फैसला किया है।
सरकार के इस फैसले से इन विधायकों को राज्य मंत्री का दर्जा मिल गया है। इससे क्षेत्र में इनका रुतबा भी बढ़ गया है, लेकिन, इससे भाजपा के तेवर चढ़ गए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का कहना है कि यह फैसला कर दिल्ली सरकार ने अपने दोहरे मापदंडों का एक और प्रमाण दिया है।
सत्ता में आने के पूर्व आप नेता सरकारी खजाने पर कम से कम बोझ डालने और सरकारी काम में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जगह विशेषज्ञों को सम्मिलित करने की बात करते थे। लेकिन सत्ता में आने पर अपने विधायकों को प्रशासनिक सुख-सुविधाओं का लाभ देने के लिए ही थोक में संसदीय सचिव बनाए जा रहे हैं।
उपाध्याय का कहना है कि दिल्ली प्रशासन एक्ट में इस प्रकार संसदीय सचिव बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। दिल्ली में पहले कभी किसी सरकार ने इतनी बड़ी संख्या में संसदीय सचिव मनोनीत नहीं किए।

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