बेटिकट यात्रियों पर अंकुश लगाने की तैयारी, टिकटों पर होगा बार कोड

02_09_2014-ticket02नई दिल्ली: सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही रेलवे टिकटों को भी बार कोड से लैस किया जा सकता है। रेल मंत्रलय इस पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है। इसका मकसद ट्रेनों में टिकट चेकिंग के नाम पर होने वाले खर्च को बचाना, बेटिकट यात्रियों पर अंकुश लगाना और रेलवे की आमदनी बढ़ाना है।

सोमवार को रेलवे बोर्ड में कुछ कंपनियों को इस बाबत प्रेजेंटेशन के लिए बुलाया गया था। प्रेजेंटेशन में कंपनियों ने दिखाया कि मेट्रो की तरह रेलवे स्टेशनों पर भी प्रवेश और निकास द्वारों पर ऐसी मशीनें लगाई जा सकती हैं जो टोकन की जगह बार कोड वाले टिकटों को पढ़कर यात्रियों के टिकट चेक कर सकती हैं। प्रेजेंटेशन के आधार पर कंपनियों से ‘एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट’ निविदाएं मंगाई जाएंगी। चुनी गई कंपनियों को छह महीने तक खास जगह पर अपनी मशीन लगाने और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन करने को कहा जाएगा।

इसका मूल्यांकन रेलवे की आइटी संस्था सेंटर फार रेलवे इन्फारमेशन सिस्टम्स (क्रिस) करेगी। वह सफल कंपनी को चुनिंदा रेलवे स्टेशनों पर मशीन लगाने व छह महीने तक आजमाने को कहेगी। यदि प्रयोग कारगर रहा तो क्रिस टेंडर के आधार पर ऐसी 25 प्रणालियां खरीदने के आर्डर दे सकती है। इस तकनीक को रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) और अनरिजर्व टिकटिंग सिस्टम (यूटीएस) के साथ समायोजित किया जाएगा। आगे चलकर इस तकनीक का प्रयोग टिकट चेकिंग में भी हो सकता है।

सैकड़ों ट्रेनों में रोजाना हजारों टीटीई टिकटों की चेकिंग करते हैं। इसके लिए उन्हें प्रत्येक टिकट की आंखों से जांच करनी पड़ती है, जिसमें समय लगता है। टिकट में गड़बड़ी होने पर टीटीई या तो मौके पर पेनाल्टी की रसीद काटता है या फिर यात्री के साथ आगे-पीछे सौदा करता है।

इस भ्रष्टाचार से रेलवे का नुकसान तो होता ही है, गलत यात्रियों को सही यात्रियों की जगह घेरने का मौका मिलता है। टिकटों पर बार कोडिंग से ये संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। क्योंकि तब हाथ की मशीन टिकट को पढ़ेगी और यदि पेनाल्टी वगैरह लगाई गई है तो उसका ब्योरा भी सेंट्रल सर्वर में भेज देगी।

मोदी सरकार भ्रष्टाचार पर चौतरफा वार के मूड में हैं। इसके लिए तकनीक की हरसंभव मदद ली जा रही है। इस मामले में रेलवे विशेष रूप से सरकार के निशाने पर है। सरकार को लगता है कि रेलवे में छोटी-छोटी चीजों को सुधार कर न केवल यात्रियों की दिक्कतें दूर की जा सकती हैं, बल्कि रेलवे की आमदनी भी बढ़ाई जा सकती है।

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