मन की राह

28_04_2015-28development1aकरियर के सफर पर कामयाबी की उड़ान भरना चाहते हैं, तो बाहर या दूसरों की तरफ देखने या उनका अनुकरण करने की बजाय अपने भीतर देखें और खुद को तलाशें। अपनी पसंद के क्षेत्र में काम करके अपार खुशी तो मिलेगी ही, आप लगातार आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित होंगे। कैसे चुनें मन की राह, बता रहे हैं अरुण श्रीवास्तव…
स्कूली दिनों के दौरान एक दिन भरी क्लास में पढ़ाते हुए अध्यापिका ने एक स्टूडेंट को अचानक खड़ा करके पूछा, ‘बताओ, अगर पानी से भरा बर्तन गिर जाए, तो उसका पानी किधर बहेगा?’ अचानक पूछे गए सवाल के जवाब में अचकचाते हुए भी स्टूडेंट के मुंह से निकल पड़ा, ‘जिधर ढलान होगी, पानी उधर ही बहेगा।’ इस जवाब के लिए उसके पास सोचने का समय बिल्कुल ही नहीं था, लेकिन कॉमन सेंस रखने वाला कोई भी व्यक्ति यही जवाब देता। पानी या कोई भी द्रव पदार्थ जमीन पर गिराया जाए, तो वह पहले उधर ही बहेगा, जिधर उसे कुछ ढलान मिलेगा। यह पानी या किसी भी द्रव का मूलभूत स्वभाव है।
दुविधा करें दूर
इस तरह का उद्धरण देने का अभिप्राय महज यह बताना है कि प्रकृति के हर प्राणी का अपना एक मूल स्वभाव होता है, जिसके अनुसार वह आचरण करता है। इंसान के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि वह अपनी प्रवृत्ति को समझते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करे। यहां यह बात पढ़ाई और करियर के खास संदर्भ में की जा रही है। दसवीं-बारहवीं का एग्जाम दे चुके लगभग सभी स्टूडेंट आगे के सफर को लेकर रोमांचित होने के साथ-साथ कुछ दुविधाग्रस्त भी होंगे। हो सकता है कि कुछ को अपना आगे का लक्ष्य साफ दिखाई दे रहा हो, लेकिन अधिकतर स्टूडेंट्स को आगे का रास्ता धुंधला दिख रहा होगा। आगे क्या पढ़ें, क्या चुनें, कौन-सा करियर उनके लिए उपयुक्त होगा? जैसे ढेरों सवाल उनके दिमाग में चल रहे होंगे। उत्तर भारत के तमाम इलाकों में एक जो आम परिपाटी है, वह है इंजीनियरिंग या मेडिकल एंट्रेंस की तैयारी करने की या फिर आइएएस या पीसीएस में जाने की। कुछ ही होते हैं तो अपने मूल स्वभाव को समझते हुए उसके मुताबिक करियर चुनने का साहस करते हैं। हां, चूंकि ऐसे लोग अपनी क्षमता-योग्यता को लेकर कॉन्फिडेंट होते हैं, इसलिए दूसरों की आलोचनाओं की परवाह न करते हुए अपनी मंजिल हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं। लेकिन ज्यादातर स्टूडेंट दूसरों को देखकर उन्हीं का अनुकरण करने लगते हैं, बगैर इस बात पर विचार किए कि वह उनकी प्रवृत्ति से मेल खाता भी है या नहीं।
समझें अपनी प्रकृति-प्रवृत्ति
अगर आप तमाम कामयाब लोगों के जीवन पर गौर करें, तो यही पाएंगे कि उन्होंने अपने मन की राह पर चलने की हिम्मत दिखाई। इसके लिए उन्हें परिवार के कड़े विरोध का भी सामना करना पड़ा, लेकिन हार मानना या दूसरों के मन-मुताबिक चलना उन्हेंकतई मंजूर नहीं था। उन्हें या तो परिजनों को मनाने में कामयाबी मिली या फिर उन्होंने विद्रोह-विरोध के साथ ही अपने मन की राह चुनी। … और एक दिन जब उन्हें कामयाबी मिल गई, तो वे सब भी साथ आ मिले, जो कभी उनकी पसंद का विरोध करते थे। आखिरकार उनका भी सपना तो अपने बेटे या बेटी को खुश देखना ही था। ऐसे में अपने मन की आवाज को सुनना और समझना बेहद जरूरी है, ताकि आप उसके मुताबिक आगे का रास्ता चुन सकें।
अंधानुकरण की अनदेखी
अगर आप इसलिए दूसरों के पीछे चलते हैं, क्योंकि आप अपनी पसंद को समझ नहीं पाते, तो फिर थोड़ा ठहरें। इस बात से परेशान न हों कि आप खुद से इस दिशा में सोच पाने में सक्षम नहीं हैं। दूसरों का अनुकरण करने की बजाय कुछ दिन (एक या दो सप्ताह) खुद को तलाशें, समझें। अपने भीतर झांकें। सुबह से शाम तक की अपनी गतिविधियों-व्यवहार का आकलन करें। देखें कि आपको क्या करना या क्या नहीं करना पसंद है। तकनीकी काम के प्रति जल्दी आकर्षित होते हैं या कला, लेखन, निर्माण या किसी और तरह के काम के प्रति। एक या दो सप्ताह तक बारीकी से अवलोकन करने के बाद निष्कर्ष निकालें। अगर फिर भी समझ में न आए तो किसी काउंसलर से मिलें। उन्हें अपनी समस्या बताएं। लेकिन आंख मूंदकर किसी का अनुकरण बिल्कुल न करें, क्योंकि अगर ऐसा करेंगे, तो हो सकता है कि आगे चलकर आपको अपनी गलती का एहसास हो।
राहें बेशुमार
आज के समय में यह कतई न सोचें कि केवल इंजीनियरिंग-मेडिकल जैसे पारंपरिक कोर्स करके ही आप अपना भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं। ऐसे हजारों युवा आपको मिल जाएंगे, जो बाकायदा डिग्री लेने के बावजूद बेरोजगार हैं। इसलिए बेमन से ऐसा कोर्स कतई न करें, जो आपकी रुचि का नहीं है। आज के समय में तमाम नए क्षेत्र सामने आ गए हैं, जिनमें नाम और पैसा कमाया जा सकता है। आज मिमिक्री से लेकर डांस, एक्टिंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, एनिमेशन, गेमिंग, डिजिटल मार्केटिंग, वेब डिजाइनिंग, राइटिंग, कॉपी एडिटिंग, न्यू मीडिया जैसे अनगिनत नये फील्ड हैं, जिनमें आप अपनी पसंद के अनुसार पंख लगा सकते हैं।
डेडिकेशन जरूरी
हां, यह जरूर है कि आप अपनी पसंद के मुताबिक जो भी फील्ड चुनें, कामयाबी के लिए आपको उसमें पूरी तरह से डूबना होगा। आधे-अधूरे मन से प्रयास करने पर आपको कामयाबी कतई नहीं मिल सकती। जो भी फील्ड चुनें, उसकी अपेक्षाओं के मुताबिक खुद को तैयार करने का प्रयास करें। उसमें अपनी स्किल निखारने के लिए उपयुक्त संस्थान से आवश्यक कोर्स करने के साथ-साथ खुद से प्रयास करते हुए उस फील्ड में खुद को अधिक से अधिक निखारने का प्रयास करें। थोड़ी अतिरिक्त पहल करते हुए संबंधित इंडस्ट्री से संपर्क करके प्रैक्टिकल बारीकियां भी सीखने का प्रयास करें।
उत्साह का साथ
अगर आप कोई नया फील्ड चुनते हैं, तो हो सकता है उसमें आगे आपको तुरंत मनचाही कामयाबी न मिले। ऐसे में घबरायें नहीं। हताश होकर कदम पीछे न खींचें। संयम के साथ आगे बढ़ते रहें। हां, इस बात पर भी जरूर गौर करते रहें कि आपको कामयाबी क्यों नहीं मिल रही या आप से गलती कहां हो रही है। उस गलती को दूर करें। अपने आत्मविश्वास और उत्साह का स्तर कम न होने दें। आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आप कामयाबी की सीढ़ियां
चढ़ने लगे हैं।
* कोई भी कोर्स या करियर चुनने की बजाय अपने मन की आवाज सुनकर ही कदम बढ़ाएं।
* आंख मूंदकर दोस्तों या किसी और के बताए रास्ते पर कतई न चलें।
* जो भी राह चुनें, उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए खुद को तैयार करें।
* जिस रास्ते पर बढ़ें, उसके लिए पूरे मन से काम करें।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY