मुआवजे के लिए लोग गढ़ रहे फर्जी कहानियां

देहरादून। उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा में लाशों और लापता लोगों के नाम पर मुआवजे की लूट भी शुरू हो चुकी है। प्रशासन के समक्ष ऐसे लोग भी पहुंच रहे हैं, जो परिजनों के गायब होने या मौत होने की झूठी कहानियां गढ़कर मुआवजा मांग रहे हैं। मंगलवार को तीन साल पहले मर चुकी मां को दोबारा केदारनाथ में मृत दिखाकर मुआवजा लेने का मामला सामने आया था। अब एक महिला यह कहकर गुरुवार को सहस्त्रधारा हेलीपैड पर मुआवजा लेने पहुंची कि उनके पति व आठ बच्चे केदारनाथ आपदा में लापता हो चुके हैं। केदार घाटी में जितनी बड़ी आपदा आई है और जिस तरह बड़ी संख्या में जन-धनहानि हुई है, उसे देखते हुए आशंका है कि मुआवजे के नाम पर लूट की घटनाओं में इजाफा होगा।

सरकारी मशीनरी के सामने इस बात की चुनौती है कि वास्तविक आपदा पीड़ितों को आसानी से मुआवजा मिल जाए और धोखाधड़ी करने वाले पकड़ में आ जाएं। गुरुवार अपराह्न करीब तीन बजे एक महिला सहस्त्रधारा हेलीपैड के पुलिस सहायता केंद्र पर पहुंची।

उसने अपना नाम शायरा बताया और मसूरी क्षेत्र के विधायक की सिफारिश का हवाला देते हुए मुआवजे की प्रक्रिया के बारे में पूछताछ करने लगी। महिला को पीड़ित का परिजन मान पुलिस ने उससे सारी जानकारी ली, ताकि आगे की कार्रवाई हो सके। महिला ने बताया कि उनके पति नफीस और आठ बच्चे, जिनकी उम्र दो साल से लेकर 20 साल के बीच थी, केदारनाथ हादसे के बाद से लापता हैं।

शक होने पर पुलिस ने उससे सवाल-जवाब शुरू कर दिया। यह पूछने पर कि वे सभी वहां कैसे गए। महिला ने जबाव दिया कि हेलीकॉप्टर से। पुलिस ने पूछा कि हेलीकॉप्टर में कितने लोग सवार थे। महिला का जबाव था 20। इसी तरह महिला ने काफी अटपटे और समझ में न आने वाले जवाब दिए, जिससे पता चल गया कि वह झूठ बोल रही है। उसे तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

सहस्त्रधारा हेलीपैड के समन्वय अधिकारी व सीओ स्वतंत्र कुमार सिंह के मुताबिक, मुआवजे के लिए पहुंच रहे लोगों के प्रति अधिक सावधानी बरती जाएगी, ताकि कोई व्यक्ति गलत तरीके से मुआवजा न हड़प ले। यह भी ध्यान रखा जाएगा कि वास्तविक लोगों को इससे अनावश्यक परेशानी न हो।

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