यहां लंबा चलता है अवैध खनन का खेल

देहरादून | उत्तराखंड में अवैध खनन का जबर्दस्त खेल सालों भर चलता है। भारी बारिश के दौरान भी नदियों से रेत और बजरी निकासी का कार्य चलते रहता है, लेकिन पुलिस से लेकर जंगलात महकमे के कर्मचारियों और अधिकारियों को कुछ भी नजर नहीं आता।

प्रदेश के माफिया की कोशिश रहती है कि नदियों से नियम के अनुसार खनन करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से अनुमति मिले ही न। इसको लेकर वे अपना दबाव हर स्तर पर बनाते है।

नदियों की संख्या ज्‍यादा
प्रदेश में नदियों की संख्या की सूची लंबी है। हर नदी से रेत और बजरी की निकासी होती है, लेकिन चुनिंदा ही ऐसी नदियां है। जिनसे खनन करने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से प्रदेश सरकार ने अनुमति ली है। प्रदेश सरकार अनुमति न ले। अवैध खनन का सिलसिला चलता रहे। इसको लेकर माफिया नेताओं से लेकर नौकरशाहों तक पर अपना दबाव बनाते हैं, जिससे वे अवैध खनन के जरिये चांदी कूटते रहे।

हालात यह है कि बारिश के दिनों में भी बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया जा रहा है, लेकिन हर स्तर पर चुप्पी साधी जा रही है। कुमाऊं से लेकर गढ़वाल तक की नदियों की एक ही स्थिति बनी हुई है। खासतौर पर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में सबसे अधिक नदियों से अवैध खनन का काला कारोबार किया जा रहा है।

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