राजधानी मे और महाविद्यालय खोले जाये

(राजेन्द्र जोशी)। कुछ महाविद्यालयों विशेषतः डीएवी पीजी कालेज एवं डीबीएस पीजी कालेज देहरादून में अनुमन्य संख्या में कई अधिक प्रवेश दिये जाने के सम्बन्ध में विगत 15 दिनों में आन्दोलन के कारण महाविद्यालय को बन्द किया जाता रहा है। इस सम्बन्ध में यह सभी को विदित है कि महाविद्यालय के संसाधन अत्यधिक सीमित है। अध्ययन कक्षों एवं अन्य सुविधाओं का नितान्त अभाव है, डीएवी महाविद्यालय में स्वीकृत संख्या में लगाकर 3 गुना प्रवेश दिये जाने से उŸाराखण्ड राज्य की उच्च शिक्षा की गुणवŸाा के उपर प्रश्नवाचक चिन्ह है। या तो विधानसभा सत्र 2010 एवं 2011 में मैंने इस हित में डीएवी एवं मसूरी क्षेत्र में नये महाविद्यालय की थी। या तो उŸाराखण्ड राज्य बनने के बाद देहरादून महानगर की विधानसभाआंे एवं मसूरी की विधानसभा में एक भी नया राजकीय महाविद्यालय नहीं खोला गया है जबकि पूरे प्रान्त में राज्य गठन के उपरान्त 35 महाविद्यालय खोले गये है। पूरे गढवाल क्षेत्र का शिक्षा की दृष्टि से दबाव सब देहरादून महानगर पर पड़ता है। अतः उच्च शिक्षा की गुणवŸाा बनाये रखने एवं जनभावनाओं की पूर्ति हेतु इस क्षेत्र विशेषतः गढ़ी कैंट, रायपुर इत्यादि मंे चार नये राजकीय महाविद्यालय खोलने की अति आवश्यकता है।
मसूरी विधायक गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री की आलोचना कहते हुए कहा कि जिस प्रकार से उŸाराखण्ड में आपदा एवं अन्य समस्याओं के समाधान में दूरदृष्टि का अभाव प्रकट होता है उसी प्रकार उन्होनें उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं के साथ खिलवाड़ किया । क्या कोई मुख्यमंत्री किसी महाविद्यालय की छात्र संख्या विद्यमान नियम एवं संविधान को ताक पर रखकर स्वंय छात्र संख्या बढ़ा सकता है जबकि तथ्य ये है कि संविधान के समक्ष महामहिम राज्यपाल ने 19 जुलाई 2013 को प्रवेश के समक्ष विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवŸाा बनाये रखने तथा परिसरों में सृजनात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाये रखने के लिए आदेश निर्गत कर दिया है। मुख्यमत्री द्वारा इस प्रकार की कारवाही ने स्थिति को मजाक बनाकर के रख दिया है। विधायक गणेश जोशी ने मुख्यमंत्री से पुनः मांग की है कि वो वास्तव में उच्च शिक्षा के पुर्नवहन के लिए थोड़ी भी इच्छा रखते है तो उन्हें नये महाविद्यालय खोलने चाहिए।

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