यहां लगातार भूकटाव से बेहद कम रह गई खेती की जमीन!

0
252

कहते हैं भारत गांव में बसता है, क्या ये सिर्फ आज एक जुमला ही रह गया है। गांव के लोगों को ना तो आज सुविधा मिल रही है ना ही उनका सुध लेवा कोई गांवों की तरफ जाता है। जो बची थी जमीन वो भी पानी के बहाव में बह रही है। मगर सरकार और सरकार के अधिकारी इनकी कुछ भी सुनना नहीं चाहते।

नैनीताल के ढैरा गांव के लोग इन दिनों अपनी खेती को बचाने में जुटे हैं। बरसात में हुये भूकटाव से गांव के लोगों की खेती कम होते जा रही है। खेत गौला नदी के कटाव में लगातार भूस्खलन की चपेट में है। दरअसर गौला नदी से ढ़ैरा गांव की जमीन बह रही है, लेकिन कोई भी इनकी सुध लेने नहीं आया। नदी के कटाव में गांव के 15 किसानों की जमीन बारीश के साथ बह गई जो बची है वो भी कटाव की चपेट में है।

धीरे धीरे कम होती जमीन को देख कास्तकारों के साथ ग्रामीणों का दर्द बाहर निकला तो ईश्वर दत्त और गंगा देवी ने बताया कि बारिश के दौरान गांव में ड़र का सा माहौल हो जाता है नदी के रुख वो कई सालों से परेशान है, लगातार परेशानियों के बाद भी कोई अधिकारी उनकी नही सुन रहा है अब गांव के लोग करें तो करें क्या।

गौरतलब है कि 1993 से गांव की खेती में लगातार कटाव हो रहा है, लेकिन साल 2011 के बाद भूकटाव से खेती कम होने की गति में तेजी आ गई। ऐसा नही है कि गांव के लोगों ने अपनी जमीन को बचाने के लिये फरियाद ना लगाई हो। विधायक से लेकर डीएम तक सीडीओ समेत कृर्षि अधिकारी से लेकर सीएम तक गुहार लगा दी, लेकिन कोई भी सुनने को तैयार ही नहीं है। जब हमने गांव के लोगों का दर्द डीएम के पास रखा तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया। डीएम दीपक रावत ने इस मामले में साफ कहा कि वो इस मामले में कुछ भी नही बोलेंगे।

बहरहाल गांव के किसान चाहते है कि उनकी जमीन को खत्म होने से बचाया जाए, खेती बचाने के लिये सुरक्षा दिवार बनाये जाये. लेकिन डीएम समेत कोई भी अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से तो उम्मीद करना भी बेमानी है। बेहतर होगा कि गांव के लोगों का दर्द सरकार को समझ में आये और ग्रामीणों को राहत मिले।

NO COMMENTS