घेस से सीखेगा देश! — मटर क्रांति के बाद सेब की मिठास दिलायेगी घेस को नयी पहचान! 

संजय चौहान

सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाक के घेस गाँव के बारे में बरसों से एक कहावत प्रचलित थी की घेस से आगे नहीं देश। ये कहावत इसलिए प्रचलित थी की घेस घाटी में मूलभूत सुविधाओं का घोर आभाव था। लेकिन आज घेस गाँव के निवासी और वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन बिष्ट के प्रयासों के बदौलत घेस गाँव देश मे अपनी अलग पहचान की ओर अग्रसर हो चला है।

विगत दिनों घेस की मटर क्रांति नें घेस को देश में पहचान दिलाई तो अब घेस का सेब देश में छानें की शुरुआत कर चुका है। घेस गाँव में सेब के पेड़ से फलों की पहली खेप तैयार होने को है। यदि सब कुछ सही रहा तो आने वाले दिनों में घेस में इटेलियन वैरायटी के पेड़ों से आपको सेब की बंपर पैदावार यहाँ दिखेगी। जिससे न केवल घाटी को पहचान मिलेगी अपितु लोगों की आर्थिकी भी मजबूत होगी और पहाडो में रोजगार सृजन की उम्मीदों को पंख लगेंगे। सेब की ये वैरायटी 4000 फुट से अधिक ऊंचाई वाले सभी गांवों में हो सकती है।

घेस गाँव के निवासी और वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन बिष्ट का मानना है कि आने वाले दिनों में घेस का सेब देश में अपनी मिठास से अलग पहचान बनायेगा। घेस उत्तराखंड का सदूरवर्ती गाँव है। लेकिन अब घेस से देश सीखेगा, पप्पू भाई की मदद से घेस की मटर क्रांति नें लोगों को हतप्रभ किया तो अब घेस के सेब से लोग वापस अपने पहाड़ लौटने की ओर अग्रसर होंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी भी घेस को डिजिटल गाँव बनाने मे अहम योगदान दे रहे है। अगर सब कुछ सही रहा तो आने वाले दिनों मे घेस पूरे देश में एक माॅडल विलेज होगा।

वास्तव मे देखा जाय तो घेस के अर्जुन बिष्ट जी के प्रयास धीरे धीरे रंग ला रहे है। उनकी जितनी भी भूरी भूरी प्रशंसा की जाय वो कम ही है। यदि उनकी तरह ऐसे प्रयासों को सभी लोग अपने अपने गाँवों में धरातल पर अमलीजामा पहनाने की कयावद करें तो पहाड़ के गांवो की तस्वीर बदल सकती है—–।

तो फिर देर क्यों हिटो अपने पहाड़

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