लोक गायकों ने की राज्य सरकार से लोक संस्कृति को बचने की मांग

preetam singerकिसी भी समाज की भाषा उस समाज की पहचान होने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर भी होती है, जिसे संरक्षित रखने के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है

उत्तराखंड की संस्कृति और भाषा को विलुप्त होने से बचाने के लिए लोक गायकों ने सरकार से इसे विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग की है उत्तराखंड की प्रमुख संस्कृति और भाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी है, जो कि अब धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है

हमारी नई पीढ़ी मॉर्डनाइजेशन के इस जमाने में अपनी संस्कृति और भाषा को भूलते जा रही है, जिसको बचाने के लिए कई बार मांग उठती आई है विलुप्त हो रही इस संस्कृति और भाषा को बचाने के लिए अब लोक गायकों ने सरकार से मांग की है कि सरकार इस संस्कृति और भाषा को संरक्षित रखने के लिए इन्हें विद्यालय शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल करें

लोक गायिका मीना राणा का कहना है कि किसी भी समाज की पहचान उसकी बोली और संस्कृति से होती है, जिससे उसे भीड़ में अलग से पहचाना जा सकता है उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तो पहचान ही लोक संस्कृति और भाषा है, जिसे बचाने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए

जागर सम्राट और प्रसिद्ध लोक गायक प्रीतम भरतवाण का मानना है कि हमारी नई पीढ़ी मॉर्डन क्लचर की ओर ज्यादा आकर्षित हो रही है, जिससे हमारी संस्कृति और भाषा विलुप्त होने की कगार पर है और जिसके लिए सरकार को इसे विद्यालयी शिक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल करने की जरूरत है

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