घंटाकर्ण देवता की अर्द्धकुंभीय जात और विकास मेला शुरू!

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श्रीनगर गढ़वाल के निकट कीर्तिनगर ब्लाक स्थित लोस्तू पट्टी के घंडियालधार में घंटाकर्ण देवता की 6 दिवसीय अर्द्धकुंभीय जात और विकास मेला आयोजित किया जा रहा है।

26 गांवों के समूह लोस्तू पट्टी में स्थित पौराणिक घंटाकर्ण सिद्धपीठ मंदिर में हर 12 वर्ष में पूर्ण कुंभीय और 6 वर्ष मेंअर्द्धकुंभीय जात के तहत देवयात्रा और मेला आयोजित किया जाता है। मेले के 6 दिनों के दौरान घंटाकर्ण देवता के पौराणिक मंदिर परिसर में चारों प्रहर में यज्ञ एवं पूजाएं की जायेंगी।

मेले के पहले दिन जहां देवनिशानों और देवता के पश्वाओं के साथ भगवान घंडियाल की शोभायात्रा देवगढ़ी से घंडियालधार पहुंची वहीं इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने घंटाकर्ण देवता के दर्शन कर पुण्य प्राप्त किया।

26 गांवों की लोस्तू पट्टी में 18 जातियां निवास करती हैं जो घंटाकर्ण देवता को अपना आराध्य मानती हैं। माना जाता है कि घंटाकर्ण सिद्धपीठ में आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिस वजह से बड़ी संख्या में देश-विदेश में रहने वाले क्षेत्र से जुड़े लोग अर्द्धकुंभीय व पूर्णकुंभीय जात एवं विकास मेले में अपने परिवार के साथ शिरकत करने आते हैं।

घंटाकर्ण देवता मंदिर समिति के अध्यक्ष सत्ते सिंह भंडारी का कहना है कि जिस वर्ष वैशाख माह में हरिद्वार में पूर्ण कुंभ व अर्द्धकुंभ होता है उसी वर्ष पौष माह में घंडियालधार लोस्तु में पूर्ण कुंभीय जात 10 दिन 9 रात्रि की तथा अर्द्धकुंभीय जात 6 दिन और 5 रात्रि की होती हैं।

इस मौके पर घंटाकर्ण सिद्धपीठ मंदिर में भगवान के दर्शनों को पहुंचे अरंविद राणाकोटी का कहना है कि वे हमेशा जात एवं विकास मेले के दौरान यहां पहुंचते हैं। वे क्षेत्र से जुड़े और राज्य और देश से बाहर रहने वाले क्षेत्र के लोगों से अपील भी करते हैं कि पौराणिक समय से चली आ रही इन धार्मिक परम्पराओं में हिस्सा जरूर लें जिससे वे अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक विशिष्ट परम्पराओं को जान सकें।

श्रद्धालु रामसिंह और कुसुमलता का कहना है कि उनकी हमेशा से कोशिश रहती है कि जब भी घंडियाल देवता की जात, पूजा और मेला हो तो वे उसमें शिरकत करें क्योंकि जब भी वे भगवान की शरण में आते हैं तो उनकी हर मन्नत पूरी होती है। उनका कहना है कि ऐसे मौके नई पीढ़ियों को एक दूसरे को जानने और अपनी संस्कृति को जानने का मौका भी होता है।

शोभा कैंतुरा जो कि घंटाकर्ण देवता के पश्वा हैं और जिन पर भगवान का अवतरण होता है, कहते हैं कि वे लोग जो संतानसुख से वंचित रहते हैं वे लोग भी भगवान के दर पर आकर ईश्वर के आर्शीवाद से संतान प्राप्त करते हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र की बहू बेटियां दूर-दूर से भगवान घंटाकर्ण के पास आकर अपनी समस्याएं रखते हैं और उनका निदान ईश्वर करते हैं।

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