मोदी जी मार्केटिंग करते हैं, किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं – राहुल गांधी

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‘‘जब तक इन्होंने हिन्दुस्तान में राज नहीं किया, तब तक इन्होंने हिन्दुस्तान के झंडे को सलाम नहीं किया; उनके सबसे बड़े नेता ब्रिटिश सरकार के सामने लड़ाई नहीं कर पाए थे। उनके एक नेता ने ब्रिटिश सरकार को चिट्ठी लिखकर जेल से मुक्त करने की बात कही थी।’’ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी-आर एस एस पर कड़ा प्रहार करते हुए ये बात जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव द्वारा 17 अगस्त 2017 को नई दिल्ली में बुलाए गए विपक्षी नेताओं के ‘साझी विरासत बचाओ’ सम्मेलन में कही। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में आर एस एस पर वार करते कहां कि जब तक इस देश में ‘वन मैन वन वोट रहेगा’ ये देश उनका हो नहीं सकता। आर एस एस के लोग न्यायपालिका, नौकरशाही, सेना, मीडिया में जिस दिन सब के सब बैठ गए, उस दिन ये देश उनका होगा, फिर ये सबसे कहेंगे कि ये देश तुम्हारा नहीं है, अब ये देश हमारा है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने किसानो की कर्ज माफी पर भी मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक लाख 30 हजार करोड़ रुपए 10-15 उद्योगपतियों का माफ किया है जबकि तमिलनाडु के किसान जंतर-मंतर पर नंगे बैठे हैं, हर प्रदेश का किसान रो रहा है मगर मोदी जी चुप हैं। उन्होंने कहा कि मोदी जी और योगगुरु बाबा रामदेव का एक ही ‘सिस्टम’ है और वह है-‘मार्केटिंग’। पंद्रह-बीस लोग ही इस देश को चलाते हैं और यही लोग मोदी जी की मार्केटिंग भी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी जी जहां जाते हैं, वहां झूठ बोलते हैं, उनकी शक्ति बड़ी है पर सचाई से बड़ी कोई शक्ति नहीं होती। उन्होंने कहा कि चाहे मोदी हों या कोई और, वह सच का मुकाबला नहीं कर सकते और उनसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
जनता दल (यू) के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने कहा कि देश में आस्था, मजहब, सम्प्रदाय और लव जेहाद के नाम पर हिंसा की जा रही है जिससे देश की विविधता की विशिष्ट पहचान खतरे में पड़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सामाजिक सौहार्द के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जिसका सामाजिक समरसता चाहने वाले लोगों को अहिंसक तरीके से जवाब देना चाहिये। सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि देश में अघोषित आपातकाल लागू है और देश का धर्मनिरपेक्ष हिन्दू सबसे ज्यादा खतरे में है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देश को जोड़कर आजादी दिलायी थी जिस तानेबाने को समाप्त किया जा रहा है। सवाल हिन्दू या मुसलमान का नहीं है सवाल साझी विरासत को बचाने का है । सम्मेलन में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, सीताराम येचुरी, फारुक अब्दुल्ला, रामगोपाल यादव, तारिक अनवर, मनोज झा, प्रकाश अंबेडकर, टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर राय, जयंत चैधरी समेत विपक्ष के कई नेता भी शामिल हुए। साझी विरासत बचाओ सम्मेलन के पृष्ठ में जनता दल (यू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव जिस तरह सक्रिय रहे वह बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद बागी होते जा रहे उनके तेवरों को दिखा रहा है। यह अलग बात है कि शरद यादव जिनके सहारे अपनी आगे की सियासत की राह की तलाश में हैं फिलहाल राजनीतिक जमीन पर उनकी हालत खस्ता है और वास्तव में भाजपा-आर एस एस के खिलाफ विपक्ष की साझा रणनीति की जरूरत का भान उन्हें भी होने लगा है। गौरतलब है कि इस सम्मेलन में कांग्रेसी नेता सबसे अधिक शामिल हुए क्योंकि भाजपा के बाद कांग्रेस देश में सबसे  बड़ा राजनीतिक दल है। लेकिन मौजूदा दौर में 125 वर्ष से भी अधिक पुरानी कांग्रेस का एक-आध अपवाद छोड़कर एक के बाद एक राज्यवार चुनाव में ग्राफ नीचे गिर रहा है। उत्तर भारत में हिमाचल प्रदेश और  पंजाब में ही कांग्रेस सत्ता में है। सपा, बसपा अपने मूल आधार क्षेत्र उत्तर प्रदेश में ही चुनाव में हार के बाद घायल पड़े हैं। वामदल त्रिपुरा और केरल में सत्तारूढ़ जरूर हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में  फिलहाल उनके राजनीतिक कायाकल्प के चिन्ह कहीं दिखाई नहीं देते। यूं भी शरद यादव की सियासत को इन राज्यों में खास मुकाम हासिल नहीं है अलबत्ता बिहार में भाजपा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मजबूत चुनौती देने की स्थिति वाली आरजेडी से शरद यादव की सियासी रणनीति को लाभ मिल सकता है। दोनों पार्टियों के दुश्मन भी एक ही हैं, ऐसे में एक दूसरे के लिए वे संजीवनी हो सकते हैं. क्योंकि नीतीश के  बीजेपी से हाथ मिलाने से मुस्लिम और यादव मतदाताओं में नाराजगी बढ़ी है। ऐसे में लालू और शरद अगर एक-दूसरे के साथ आते हैं तो दोनों की राजनीतिक जमीन मजबूत हो सकती है।

राहुल बेतुकी बात करते हैं: रविशंकर प्रसाद

साझी विरासत बचाओं सम्मेलन में खास तौर से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा आर एस एस पर किये गये वार के बाद भाजपा तिलमिलाई हुई है। अविलम्ब पलटवार करते हुए केन्द्रीय मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि आर एस एस के खिलाफ राहुल के परनाना नेहरू भी शिकायत करते थे, दादी इंदिरा ने भी अभियान चलाया, राजीव गांधी बोफार्स में फंसे तो संघ की आलोचना की लेकिन हकीकत यह है कि देश के लोग संघ की देशभक्ति और समाजसेवा के कारण उनका सम्मान करते हैं। रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘पहले मैं कहता था कि राहुल बिना होमवर्क किए बात करते हैं, लेकिन मैं आज कहता हूं वह बेतुकी बात करते हैं।’’ वहीं जेडीयू नेता शरद यादव के साझी विरासत बचाओ सम्मेलन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने  कहा कि जिनकी राजनीति जेपी के चरणों में कांग्रेस के विरोध के साथ शुरू हुई, वह राहुल गांधी के बगल में बैठे हुए हैं।

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