ज्ञान की नई खोज….

सौरभ मिश्रा।

शिक्षा हर भारतीय का मौलिक अधिकार है। और शिक्षा से बंचित मतलब समाज में कुप्रभाव का जन्मलेना। अज्ञानता सामाज के पतन का मुख्य कारण होता है। ज्ञान गंगा की मुहिम को जनजन तक पहुंचाने का संकल्प लिए रन्त रैबार संस्था उत्तराखंड के दुरस्त क्षेत्र में बिगत 1 साल से कार्य कर रही है। दुर्गम सुदूर पहाड़ी क्षेत्र में संस्था लोगों तक आवश्कता के मुताबित निःशुल्क किताबे पहुंचा रही है। हर उम्र हर वर्ग हर बिषय की किताबें लोगों तक पहुंचाई जा रही है। संस्था का मुख्य उद्देश्य है कि अगर किशान खेती भी कर रहा है तो किताबों के जरिये आधुनिकता से खेती करें। मजदूर मजदूरी कर तो उसे अपनी मजदूरी पता होनी चाहिए। पशुपालन हो या बागवानी हर कामगार ज्ञान के साथ करेगा।
ग्रामीण भारत का हर ब्यक्ति हर शाम सुबह खाली समय में अखबार,मैगजीन,इंटरनेट, व पुस्तकों से जुड़ा रहे देश दुनियाँ की जानकारी लेता रहे। अपने हक़ की बातें समझे नीतिनिदेशक तत्वों को समझे मौलिक अधिकारों को समझे। यह सिर्फ जागरूकता से सम्भव है। पुस्तकालत खुलने से क्षेत्र के युवा अपराध और शराब की गर्दिश में जाने से बच सकते है। संस्था पहाड़ी क्षेत्र के हर ब्लॉक में पुस्तकालय के साथ साथ एक रन्त रैबार एग्जामनेश एंड नॉलेज सेंटर खोलने जा रही है जिस की सुरवात रिखणीखाल के अंतर्गत कोटड़ी गाँव से 25 जुलाई 2018 को किया जाएगा। यह सेंटर अत्याधुनिक तरीके से सुसज्जित होगा जिस में एक पुस्तकालय व एक एग्जामनेश एंड नॉलेज सेंटर के साथ साथ 2bhk का महमानों के रहने योग्य घर होगा। जिस में समय समय पर आने वाले एक्सपर्ट को ठहराया जाएगा।

रन्त रैबार संस्था के अध्यक्ष श्री देवेश आदमी बताते है कि सेंटर में कैरियर कॉन्सलिंग के लिए कॉन्सलिंग क्लास भी होगी, बच्चों को कैसे खेल खेल में ज्ञान दिया जाता है अनेक प्रकार की पुस्तकें भी होगी। कैरम बोर्ड, आधुनिक गैजेट्स, लैपटॉप। बालविकास, महिला शक्ति,आयुर्वेद, उत्तराखंड साहित्य, हिंदी साहित्य,उउत्तराखंड की महान विभूतियां, सामान्य ज्ञान, खेती, पशुपालन, कुटीर उद्योग, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट, की पुस्तके उपलब्ध होंगी साथ में भारतीय सेना के लिए तैयारियां करवाना। कंप्यूटर क्लास व इंटरनेट सुबिधाओं से लैस यह उत्तराखण्ड में पहला निःशुल्क पुस्तकालय होगा। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खुलने वाला यह पुस्तकालत हफ्ते के 7 दिन खुलेगा और महीने में 3 दिन कैरियर कॉन्सलिंग नशामुक्ति के क्लास भी लगेंगे। इस के अलावा सेंटर में साप्ताहिक,मासिक पत्रिका व हिंदी, गढ़वाली, अंग्रेजी के अख़बार उपलब्ध होंगे। संस्था के उपाध्यक्ष श्रीमती अवंतिका जोशी जी बताती है कि आज उन के पास हजारों की तादात में पुस्तकें है जिन को वो जनजन तक जरूरत के मुताबित पहुंचा रही है। सोशलमीडिया के माध्यम से 1 साल पहले चलाये गए इस छोटे से मुहिम ने आज बहुत बड़ा स्वरूप लेलिया है। आगे बताती है कि हम ने 1 साल पहले सोचा भी नही था कि हमारे द्वारा सोचे गए पुस्तकालय को इतनी तबज्जो देंगे कुछ समय तक तो हम भी अपने मुहिम को अहमियत नही दे रहे थे मगर एक दिन किसी अनजान ब्यक्ति से करीब 84 पुस्तकें हमारी संस्था के नाम पर भेजे और हम हैरान हो गए कि हम जिस मुहिम को मजाक में चला रहे थे उस मुहिम को लोग कितना बड़ा प्राणदायी समझते है। उन पुस्तकों के साथ एक पत्र था जिस में लिखा गया था प्रिय देवेश आदमी जी आप ने समाज के लिए बहुत अच्छा सोचा है जो किसी के नही दिखा वो आप को नजर आया। चलते रहो किसी को ज्ञान देना सब से बड़ा दान है। न उस चिट्ठी में नाम लिखा था न पता और आज भी हम को वन अंजान ब्यक्ति पुस्तक भेजता है। बस उसी दिन से हमारी पूरी टीम ने कसम खाई कि हम अब पीछे नही हटेंगे और आज प्रमाण आप सब के सामने है।

हमारी एक पोस्ट सोशलमीडिया पर पोस्ट हुई और मुहिम को लोगों ने सिर आंखों पर बिठाया देखते देखते संस्था को पठन सामग्री मुफ्त में मिलना सुरु हो गया।

संस्था का उद्देश्य है कि क्षेत्र के लोग रन्त रैबार एग्जामनेश नॉलेज सेंटर में अपना अधिक से अधिक खाली वक्त गुजारे। औऱ ज्ञानार्जन करे।

रिखणीखाल क्षेत्र के अंतर्गत 6 न्याय पंचायत है और हर न्याय पंचातय स्तर पर रन्त रैबार संस्था निःशुल्क पुस्तकालय खोलने जा रही है। निकट भविष्य में यह मुहिम उत्तराखंड के अन्य ब्लॉक में चलाया जाएगा। बिगत वर्ष प्राथमिक विद्यालय कोटड़ी में एक मिनी पुस्तकालय खोला गया जो नाकाफी साबित हुआ। और मांग बढ़ने लगी कि इस को विस्तार दिया जाय।

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