‘पिटाई‘ नहीं, ये गुंडों का हमला है।

डॉ. सुशील उपाध्याय

सुबह अखबारों में खबर पढ़ी। अमर उजाला और हिन्दुस्तान अखबार के संपादक रहे दिनेश जुयाल जी पर रात कुछ गुंडों ने हमला कर दिया। जुयाल साहब के मुहल्ले में दो दिन से कुछ लोग कानफोड़ू ढंग से डीजे बजा रहे थे। मना करने के बावजूद उन लोगों ने और तेज आवाज में डीजे बजाना शुरू किया। जुयाल साहब ने एसएसपी को शिकायत की तो पुलिस डीजे उठा ले गई। इसके बाद जुयाल साहब और भाभी जी पर हमला किया गया। उन्हें चोटें आई हैं। इस घटना को प्रायः सभी अखबारों ने छापा है, लेकिन एक अखबार, जिसमें जुयाल साहब कार्यकारी संपादक रह चुके हैं, उसमें असंवेदनशील होकर खबर लिखी गई है। खबर का टोन ऐसा है, जैसे जुयाल साहब कोई गुनाह करते पकड़े गए हों और इसलिए उनकी पिटाई कर दी गई। हेडिंग में भी पिटाई लिखा गया है और रनिंग मैटर में भी पिटाई ही छपा है। संभव है, किसी नए रिपोर्टर ने खबर लिखी हो, लेकिन इतना भी क्या अनजान होना कि ‘हमला होने’ को ‘पिटाई’ लिख दिया जाए। ‘पिटाई’ से ऐसी ध्वनि निकल रही है मानो जुयाल साहब जबरन किसी के घर में घुस गए हों, किसी से छीना-छपटी कर रहे हों, कोई गलत हरकत कर रहे हों, इसलिए लोगों ने उनकी पिटाई कर दी!!!
जो लोग दिनेश जुयाल जी को जरा भी जानते हैं, उन्हें पता है कि वे कितने सहज, सरल और संजीदा किस्म के आदमी हैं। वे छोटी-मोटी बातों पर विरोध नहीं करते। चीजों को बड़े फलक पर देखते हैं। इसके बावजूद उन पर हमला हुआ है तो यकीनन ये बड़ी घटना है। वे कानून को मानने वाले आदमी हैं, करीब 40 साल पत्रकारिता में बिता चुके हैं, लेकिन हमेशा जमीन से जुड़े रहने में यकीन रखते हैं। जिन लोगों ने हमला किया, उन्हें नहीं पता होगा कि वे किस पर हाथ उठा रहे हैं। लेकिन, इस घटना से यह जरूर पता चलता है कि गलत चीज का विरोध करने भर से गुंडे हमला कर सकते हैं। वो भी राजधानी देहरादून में।

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