नोटबंदी : नए साल का जश्न पड़ा फीका, अधिकतर बुकिंग कैंसिल!

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उत्तराखंड में पर्यटन करोबार से बहुत लोग जुड़े हैँ। लोगों को उम्मीद थी कि हर बार की तरह इस बार भी नए साल पर उनका धंधा खूब चमकेगा। इस बार अधिकतर लोगों को निराशा हाथ लगती दिख रही है। नोटबंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है। नैनीताल हो या मसूरी, अधिकतर जगह नए साल के जश्न के लिए कम लोग बुकिंग करा रहे हैं। साथ ही पहले से जो बुकिंग थी, उन्हें भी लोग कैंसिल करा रहे हैं।

नैनीताल जिले के रामनगर में करीब सवा सौ रिजॉर्ट्स हैं। नोटबंदी ने यहां इन कारोबारियों को कमर ही तोड़ कर रख दी है। यहां के कारोबारी इन दिनों काफी परेशान हैं। इसका कारण है कि नोटबंदी के बाद से इनका उद्योग करीब-करीब चौपट हो गया है। इन कारोबारियों को आशा थी कि हर साल की तरह क्रिसमस और नये साल के स्वागत के लिए यहां भारी मात्रा में पर्यटक पहुंचेंगे। लेकिन हो इसके ठीक उलट रहा है। इन दिनों यहां पूर्व में हुई इन बुकिंग को कैंसिल करने जैसे होड़ लग गई है।

पर्यटन व्यवसायी ललित मोहन बिष्ट की यदि मानें तो यहां प्लास्टिक मनी स्वीकार करने के सारे इंतजामात हैं। बावजूद इसके यहां से पर्यटकों ने मुंह मोड लिया है। जिसका कारण नोटबंदी है।

नोटबंदी के चलते यहां से सैलानी अपनी बुकिंग रद्द करा रहे हैं। हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। नोटबंदी के बाद से बैंक से उनकी आवश्यक जरुरतें पूरी करने भर का पैसा मिल पा रहा है, जिससे पर्यटकों ने इस ओर आंखे मूंद ली हैं।

बिष्ट बताते हैं कि हर साल की तरह हम इस फेस्टिवल सीजन में कुछ पैसे कमाने के सपने देख रहे थे। परन्तु नोटबंदी ने हमारे पूरे कारोबार पर ग्रहण लगा दिया है। यहां नये पर्यटक तो आना दूर की बात है। पहले जिन सैलानियों ने यहां इस फेस्टिवल के लिए बुकिंग कराई तो वह भी रद्द कर रहे है। अभी हम मोटा मोटा अंदाजा लगायें तो यहां के रिजाँर्टस के करीब 50 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो गई हैं।

वहीं रिजॉर्ट इंडस्ट्री में अपनी सेवायें दे रहे हरीश की यदि माने तो रिजॉर्ट्स का इस समय बुरा हाल है। सैलानी आ नहीं रहे, पहले जो बुकिंग हुई थी वह भी अब कैंसिल हो रही हैं। वह बताते हैं कि इस समय रिजॉर्ट में जो चहल पहल रहा करती थी, वह चहल -पहल अब गायब हो गई है। इसके अलावा इस इंडस्ट्री के अपने खर्चे पूर्ववत बने हुए हैं। कर्मचारियों का वेतन तक इस दौर में निकालना मुश्किल हो रहा है।

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