राजधानी गैरसैण के लिए प्रवासी उत्तराखण्डी भरेंगे हुंकार

 

द्वारिका प्रसाद चमोली

सरकारों की आपसी खींच तान में आज पहाड़ काफी पिछड़ गया है ! पहाड़ की बेहतरी के लिए ही उत्तराखंड राज्य का जन्म हुआ था किन्तु भौतिकवाद व सत्ता लोलुपता ने जनता के सभी सपनो को चूर चूर कर दिया ! सत्ता में बैठे लोगो को शहीदों के सपनो की भी चिंता नहीं ! गैरसैण राजधानी के नाम पर सत्ता पा लेने के बावजूद राजधानी मुद्दे को दिन प्रति दिन लटकाने का ही काम किया जा रहा है ! एक ओर पहाड़ की भौगोलिक स्थिति बिगड़ रही है तो दूसरी और रोजगार के लिए युवा लगातार पलायन कर रहे है इसका फायदा माफिया खूब उठा रहे है जिसका नतीजा है कि पहाड़ का पर्यावरण भी बदल रहा है और नित नई दुर्घटनाएं अंजाम दे रही है ! इन्ही समस्याओं का एक मात्र हल गैरसैण राजधानी है और अब दिल्ली में उत्तराखंड आंदोलन से जुड़े आंदोलनकारियों ने ठान लिया है कि गैरसैण राजधानी मुद्दे पर अब चुप बैठने से बात नहीं बनेगी और इसी मुद्दे को व्यापक रूप देने के लिए वे लगातार अपने लोगों से संपर्क बनाये हुए है और आगामी 6 मई को पार्लियामेन्ट स्ट्रीट में हुंकार रैली करने का निश्चय किया गया है इसमें उत्तराखंड की सभी सामाजिक संस्थाएं अपना सहयोग दे रही है ये विशुद्ध रूप से गैरराजनीतिक रैली होगी होने के कारण सभी उत्तराखंड निवासी एवं गैरसरकारी संगठन इस मुहिम में सम्मिलित हैं। उत्तराखंड के विकास और गैरसैण राजधानी के लिए देश की राजधानी में इस तरह की गोलबंदी उत्तराखंड के लिए बहुत अच्छी खबर है। साथ ही इन सभी सामाजिक संगठनो ने मिलकर ये भी तय किया है कि खोये हुए बच्चों को न्याय दिलाने के लिए 12 मई 2018 (शनिवार) को पार्लियामेंट स्ट्रीट , संसद मार्ग , दिल्ली में एक शांति मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने अपील की है कि बच्चों के साथ हो रहे अत्याचार के खिलाफ इस मुहीम का हिस्सा बनकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सहयोग करें। इस मौके पर  देवसिंह रावत, उमेश रावत,सुरेन्द्र हालसी, शशि मोहन कोटनाला, विजय फुलारा, मनोज आर्य,अनिल पंत,माया रावत, जया ,संजय चौहान, नीरज बावाड़ि,मनमोहन शाह, सुभाष चौहान, जया कमल किशोर नौटियाल,अभिराज शर्मा, नंदन सिंह रावत  आदि उपस्थित थे।

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