जोखिम भरा जीवन जीने को मजबूर है यहाँ के लोग

नीरज उत्तराखंडी

पुरोला। जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड पुरोला के सीमांत गाँव में निवास करने ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर है।राज्य निर्माण के 18वर्ष वाद भी इन गाँवों में निवास करने वाले लोग दूर संचार क्रांति के इस युग में जहाँ दूर संचार सेवा से वंचित है वही आयुष प्रदेश में बदहाल पड़ीं स्वास्थ्य सेवाएं के चलते स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है। मेट्रो के इस युग में एक मेटल रोड़ तक नहीं बन पाई है न ही नौनिहालो के शिक्षा की सुलभ व्यवस्था है जी हाँ ऐसे ही कुछ हाल है सर बडियार पट्टी के 8गाँव के हालात। सड़क सुविधा न होने से जनता 20 किलोमीटर की पैदल दूरी नाप कर गुन्दियाटगांव पहुंचते हैं। इसके बाद दस किलोमीटर गाड़ी का रास्ता तय करके पुरोला तहसील या बाजार पहुंचकर अपनी आम जरूरतों को पूरा करते हैं। इस क्षेत्र में दो नदियां बहती हैं केदार गंगा और सरूताल गंगा जो भारी वर्षा के कारण उफान पर हैं तथा आने जाने के पैदल रास्ते जगह जगह भू-स्खलन क्षतिग्रस्त हो गये है। इस क्षेत्र के आठ गांव,डिगाड़ी, सर लेवटाडी कसलो, किमडार, पौन्टी गोल, छानिका और बडियाड में लगभग पंद्रह सौ की आबादी निवास करती है।जो जोखिम भरा जीवन जीने को मजबूर है। बडियाड की जनता बरसात के महीने बड़े ही कठिनाई के साथ व्यतीत करती है ।ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और परेशानियों से शासन प्रशासन को कई बार अवगत करवाया लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते ऐसा लगता है कि सरकार का सीमांत वासियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। चुनावी नेता भी चुनाव के दौरान जनता को हैलीकॉप्टर के दर्शन करवाकर कोरी घोषणा का घुट पिला कर नौ दो ग्यारह हो जाते है।जनता का समर्थन और वोट हासिल करने के लिए आश्वासनो की अफीम चटाकर धूल उडाकर चले जाते हैं।चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि बोरिया-बिस्तर बांधकर सुविधाजन स्थाओं पर सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहें है।और ग्रामीणों को उनकी हालत में छोड़ दिया जाता है।पुल के अभाव में बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर गाड़ गदेरों को पार करना, स्वास्थ्य,शिक्षा की बदहाल हालत दूरसंचार सेवा और सड़क मार्ग के अभाव में जीवन यापन करना यहाँ के लोगों की अब नियति बन कई है क्या सीमांत वासियो के प्रति डब्बल इंजन की सरकार की संवेदना जागेगी ये देखना बाकी है!

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