“क से कविता” का पिथौरागढ़ में आगाज़

विनोद उप्रेती

अप्रैल 2016 में देहरादून उत्तराखंड में हुआ।  “क से कविता” कार्यक्रम आज देश के कई शहरों के साथ-साथ विदेश के अनेक शहरों भी हो रहा है। कल  पिथौरागढ़ में “क से कविता” की पहली बैठक  सम्पन्न हुई ,जिसमें लगभग  पचास कविता प्रेमियों  ने प्रतिभाग किया। सूचना विभाग  का सभागार खचाखच भर गया। इस कार्यक्रम में क से कविता ने संयोजक सुभाष रावत ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर बात की। उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा आयोजन है जिसमें अपनी नहीं बल्कि किसी अन्य रचनाकार की वह कविता सुनाई जाती है जो सबसे अधिक पसंद हो। यह ऐसा मंच है जहां हम अच्छी रचनाओं को सुनने और समझने के लिए एकत्र होते हैं। इस तरह से आयोजन हमें समान उद्देश्यों के लिए मिलने की ओर प्रेरित करते हैं।

हिंदी साहित्य प्रेमियों की ये ऐसी बैठक है जिसमे उपस्थित हर दर्शक या श्रोता अपनी प्रिय कविता का पाठ करता है लेकिन पाठ अपनी  या अपने मित्रों या सम्बन्धियों की लिखी कविता का नहीं वरन किसी दूसरे द्वारा रचित कविता का होता है। एक तरह से पाठकों का मंच है ये। समूह के हर जन की प्रिय कविताओं के आनंद से ओत-प्रोत और ऊर्जित होने का अवसर। इस नवीन आंदोलन के द्वारा आम आदमी में हिंदी भाषा व साहित्य के प्रति रुचि उत्पन्न करने और सामाजिक  साहचर्य बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इस कार्यक्रम में कोई मुख्य अतिथि या अध्यक्ष नहीं होता है । यहां सब समान भाव से कविता सुनने और सुनाने आते हैं।

 

पिथौरागढ़ में क से कविता की पहली बैठक में

चिंतामणि जोशी ने संतोष चतुर्वेदी की कविता ओलार ,

नवीन गुमनाम  ने ग़ज़ल,ललित भट्ट ने जयमाला देवलाल की कविता,राजेश पंत ने वीरेन डंगवाल की कविता दुष्चक्र में सृष्टा,सोमेश ने वीरेन दा की ‘मोटी कविता’ ,

लोकेश भंडारी ने जाकिर खान की कविता ‘मैं शून्य पर सवार हूँ’,राजीव जोशी द्वारा त्रिलोचन की कविता चंपा काले अक्षर नहीं चिन्हती,गोविंद बल्लभ भट्ट ने भगवत रावत की कविता यह महज संयोग  ,गिरीश चंद्र पांडेय  प्रतीक ने नरेश सक्सेना की कविता थोड़े से बच्चे और बाकी बच्चे ,देवाशीष सोनाल ने हजारी प्रसाद द्विवेदी,

रामलाल सागर ने कुंवर नारायण की कविता ,विक्रम नेगी द्वारा गोरख पांडे की कविता’ बच्चो के बारे में’ ,संतोष मेहता ने हरिवंश राय ,महेंद्र रावत ने वीरेन डंगवाल की कविता,चेतना ने नरेश सक्सेना की कविता अजीब बात

नूतन पाटनी ने भी नरेश सक्सेना की कविता दाग धब्बे ,

शिवम पांडेय ने राजेश जोशी की कविता ,किशोर जोशी ने बच्चन की कविता जो बीत गयी वो बात,मनीषा पांडेय ने बल्ली सिंह चीमा का गीत ‘ जनविरोधी ये व्यवस्था’ ,

कृष्ण जोशी ने गुलज़ार की कविता माँ उपले थापा करती थी,विनोद ने राही मासूम रज़ा की कविता गंगा और महादेव का पाठ और दिनेश भट्ट ने वीरेन डंगवाल की कविता इतने भोले मत बन जाना साथी का पाठ किया।

इस कार्यक्रम के स्थानीय संयोजक और संचालक महेश पुनेठा ने इस कार्यक्रम को पढ़ने की संस्कृति  के प्रसार में एक महत्वपूर्ण आयोजन है।

 

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