गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिन को “प्रेरणा दिवस” के रूप में मनाने का लिया संकल्प

द्वारिका प्रसाद चमोली

दिल्ली पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट (डी पी एम आई) अशोक नगर में उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच व् उत्तराखंड एकता मंच द्वारा एक गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे जून से चली आ रही उत्तराखंडी भाषा की क्लासेज के समापन के बाद शिक्षकों को सम्मान देने व् गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिन को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाने पर चर्चा हुई । इस अवसर पर साहित्यकार ललित केशवान , दिनेश ध्यानी , रमेश हितैषी , जयपाल रावत  व् समाज को दिशा देने वाले डॉ. विनोद बछेती, अनिल पंत , जगमोहन नेगी , सुरेंद्र हलसी, देव सिंह रावत , दयाल सिंह , उमेश रावत , संजय चौहान , रमेश चंद ,जयेन्द्र नेगी , रोशनी चमोली , लक्ष्मी बिष्ट  एवं अनेको बुद्धि जीवी, कवी , समाजसेवी उपस्थित थे। यहाँ उपस्थित सभी लोगों ने दिल्ली सरकार द्वारा उत्तराखंड भाषा अकादमी की घोषणा पर हार्दिक आभार प्रकट किया साथ ही अपनी भाषा को संविधान की 8 वी सूचि में स्थान देने के लिए संघर्ष करने का वचन लिया । डॉ. बछेती  ने कहा कि हम पशोपेश में थे कि अपनी बोली भाषा को किस तरह बचाएं इस पर साहित्यकारों ने बच्चों को क्लास के माध्यम से शिक्षा देने का निर्णय 2015 में लिया था जो निरतर बढ़ता गया और आज दिल्ली एनसीआर में लगभग 34 जगहों पर क्लासों का आयोजन किया गया इसके लिए साहित्यकारों व् समाज सेवियों का उन्होंने धन्यवाद किया साथ ही कहा कि 5 सितम्बर को कॉन्स्टिचुसनल क्लब में शिक्षक दिवस के उपलक्ष में एक आयोजन किया जायेगा जिसमे अपने इन शिक्षकों का सम्मान किया जायेगा ! इसके पश्चात अक्टूबर या नवम्बर में दो आयोजन किये जायेंगे जिसमे बच्चों व् शिक्षकों के सहयोगियों को सम्मानित किया जायेगा ! डॉ. बछेती, दिनेश ध्यानी, सुरेंद्र हलसी, मनमोहन नेगी, व् अन्य वक्ताओं ने सभी से अनुरोध किया कि 12 अगस्त को सभी लोग अपने अपने क्षेत्र में गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस को पेड़ लगाकर “प्रेरणा दिवस” के रूप में मनाएं !
गोष्ठी के अंत में जो बात सभी प्रबुद्ध जनो को अच्छी लगी वो थी पेशे से शिक्षक  जोशी द्वारा दी गयी एक नेक सलाह जिसमे उन्होंने कहा कि गढ़वाली कुमाउनी न होकर हमें उत्तराखंडी शब्द का अधिक उपयोग करना चाहिए व् अकादमी का नाम भी उत्तराखंडी भाषा अकादमी हो तो इसका प्रभाव अच्छा पड़ेगा ।

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