कहीं ये सीएम साहब के लिये खतरे की घंटी तो नहीं 

  • प्रदेश में भाजपा में सबकुछ ठीकठाक तो नहीं चल रहा 
  • अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो रहे हैं स्वर
  • सियासी घटनाक्रम के निकाले जा रहे सियासी मायने

सियासत का रंग जरूर बदल लिया लेकिन ढंग वही पुराना। दल बदला है लेकिन बल दिखाने का ढंग नहीं। आखिर ये इनका मिजाज ही है या  कुछ और। बात बहते हुये पानी की तरह साफ है कि ऐसा यहां नहीं चलने वाला है। सुधर जाइये जनाब। ठीक है कि हाईकमान की फटकार से ठंडे हो गये है कि लेकिन अंदर से भी ठंडे हो और आगे भी ठंडे ही रहोगे, कहना मुश्किल है। ये सब बातें यहां भी हैं तो वहां भी। सियासी पिफजाओं में इन दिनों कुछ ऐसी ही चर्चायें हो रही हैं। मौका है कि इसको लेकर चुस्की भी ली जा रही है। सीधी बात कहें तो भाजपा  विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन से जुड़ा घटनाक्रम और अब खबर है कि कोटद्वार विधायक हरक सिंह रावत ने भी कुछ इसी अंदाज में कुछ कह डाला। सियासी मायने तो ये भी निकाले जा रहे हैं कि जो कुछ हो रहा है वह सीएम साहब के लिये खतरे की घंटी से कम नहीं है।

अपने उत्तराखंड की सियासत के रंग निराले हैं। दो दशक से कम आयु इस उत्तराखंड ने सियासत के कई रंग देखे हैं। इस राज्य में जनता ने सरकार की कमान भाजपा और कांग्रेस को ही सौंपी है। दोनों दलों की ओर से विकास के सपने दिखाये गये लेकिन मिला तो सिर्फ बाबा जी का ठुल्लू के सिवाय कुछ नहीं। आज भी यहां का जनमानस स्वयं को ठगा हुआ महसूहस कर रहा है।

खरी बात कहें तो इस राज्य में सरकार चलाने से ज्यादा फोकस सरकार बचाने पर रहा है। ऐसा भाजपा के साथ भी रहा है तो कांग्रेस के साथ भी।

मंत्री जी व विधायक जी सियासी पिफजाओं में सुर्खियों में रहे हैं।

अपनी ही सरकार के खिलाफ स्वर मुखर होने की तो रिवायत सी बन गयी है। कांग्रेसनीत सरकार में विधायकों ने तत्कालीन सीएम हरीश रावत के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया और कांग्रेस का हाथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। मौका देखते हुये भाजपा ने इनको पार्टी में शामिल कर दिया लेकिन इनमें से कुछ यहां भी वही करना चाह रहे हैं जो कांग्रेस में रहकर किया था। बानगी के तौर पर हरिद्वार जिले के खानपुर  विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को ही ले लीजिये। हालिया सियासी घटनाक्रम के तहत चैं​पियन साहब ने सीएम साहब टीएस रावत के खिलाफ स्वर मुखर कर दिये और सीएम की शिकायत करने दिल्ली तक पहुंचे गये लेकिन इस बार उन्हें फटकार पड़ी। भाजपा ने  नोटिस थमा दिया। वक्त की नजाकत देखते हुये चैंपियन साहब ने

माफी मांगने में ही भलाई समझी। मामला थमा क्या कि अब कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भी कोटद्वार कुछ ऐसा कह दिया जो शायद भाजपा को नागंवार गुजरे। खबर है कि कोटद्वार में हर​क सिंह रावत के  स्वरों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। इस मामले में होता क्या है कि यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा में अंदरखाने सबकुछ ठीकठाक तो नहीं चल रहा है। समय रहते हुये इसको ठीक किया जाना चाहिये।

ऐसा भी नहीं है कि सभी का यही हाल है। कै​बिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की कार्यशैली एकदम सही है। वे अपने विभाग में बेहतर काम करने के साथ ही राजनीतिक मर्यादा और भाजपा की नीतियों का पूरी तरह पालन करते हुये दिख रहे हैं। बहरहाल, सियासत है इसका मिजाज ही एकदम जुदा है। देखते हैं कि आने वाले दिनों में अपने उत्तराखंड की ये सियासत किस करवट मोड़ लेती है।

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