उत्तराखण्ड लोकभाषा के मजबूत स्तम्भ थे स्व. भगवती प्रसाद नौटियाल

द्वारिका प्रसाद चमोली

उत्तराखंड के जाने माने साहित्यकार स्व. भगवती प्रसाद नौटियाल जी की स्मृति में उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच, उत्तराखंड एकता मंच एवं दिल्ली पैरामेडिकल इंस्टीटूट द्वारा न्यू अशोक नगर, दिल्ली में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा मे उपस्थित नौटियाल जी के पुत्र, पुत्री, दामाद व साहित्यकारों, कवियों व समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। स्व. नौटियाल जी की पुत्री कुसुम नौटियाल ने पिता की उपलब्धियों को उनकी कार्य के प्रति समर्पित भावना व उनसे जुड़ी यादें सबके साथ साझा किया साथ ही उन्होंने कहा कि मेरे लिए ऐसी महान विभूति की पुत्री होना सौभाग्य की बात है।
सभा का संचालन उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच के अध्यक्ष दिनेश ध्यानी ने किया। उत्तराखंड के साहित्यकार पूरण चंद काण्डपाल , पत्रकार देव सिंह रावत , साहित्यकार व कवि रमेश हितैषी व दिल्ली पैरामेडिकल इंस्टीटूट के निदेशक व समाज सेवी डॉक्टर विनोद बछेती ने अपने संबोधन में नौटियाल जी को श्रद्धांजलि स्वरूप उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
स्व. भगवती प्रसाद नौटियाल जी का जन्म 10 मई 1931 को गौरिकोट, पौड़ी गढ़वाल में हुआ। वे शिक्षाविद, समीक्षक, चिंतक व साहित्यकार होने के साथ विनम्र व्यक्ति थे। साहित्य के क्षेत्र में उनकी पुस्तक हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियां एवं प्रमुख पत्रकार काफी चर्चित रही। अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में वे उत्तराखंड लोकभाषा के लिए व्याकरण व त्रैभाषिक शब्दकोश दे गए जिसका लाभ भावी पीढ़ी उठा सकती है।

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