पहाड़ की मांझियां, खेतों में रोपणी के लिए फवाडे हाथों मे लेकर गाँव की नहर को दुरुस्त कर खेतों को सींचने की तैयारी! 

 संजय चौहान

पहाड़ की खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर है यदि समय पर बारिस हो जाती है तो किसान की बांछे खिल जाती है। और यदि समय पर बारिश न तो किसान को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। पहाड़ के खेतों में धान की रोपाई अषाड महीने के शुरुआत से शुरू हो जाती है। क्योंकि इस दौरान प्री मानसून और मानसून की झमाझम बारिश होंने से गाड-गदेरे, नदी नालों, और चाल खाल, गूल, नहरों में पानी बढ़ जाता है। और लोग नहरों के द्वारा पानी को अपने खेतों तक पानी पहुंचाते हैं ताकि खेतों में रोपाई समय पर हो सकें।

इन दिनों सीमांत जनपद चमोली के पोखरी ब्लाक के सांकरी गाँव में गांव की नहर में पानी न होने से ग्रामीणों को खेतों में रोपाई करना बेहद मुश्किल लग रहा था। जिस कारण से ग्रामीण बेहद चिंतित थे। इन सबके बीच आज गाँव वालों नें खुद फवाडे हाथों मे लेकर नहर में पानी चालू करने के लिए गाँव के समीप (बामनाथ मंदिर) बहने वाले गदेरे से गाँव की क्षतिग्रस्त और सूखी नहर में पानी चालू करने का बीड़ा उठाया। आज सुबह से ही गाँव के सभी ग्रामीण और महिलाएँ इस काम में जुट्टी थी। गाँव की महिलाओं नें कहा की कल से उन्हें खेतों में रोपणी लगानी है इसलिए आज हर हाल में हम इस नहर में पानी चालू करेंगे ताकि खेतों तक पानी पहुंचे और गाँव की रोपणी हो सके।

सांकरी गाँव के सभी ग्रामीणों और महिलाओं के सामूहिक प्रयास को सैल्यूट! अगर इसी तरह सभी लोग अपने अपने गाँव की समस्याओं को सहभागिता के जरिए दूर करने का प्रयास करें तो दूसरों पर निर्भरता स्वतः समाप्त हो जायेगी। और समस्याओं का समाधान भी तत्काल हो जायेगा।

NO COMMENTS