उत्तराखंडः मोदी के सोलर मिशन में 100 करोड़ की खुली लूट

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समय साक्ष्य ब्यूरोः

सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए देश में चल रहे सोलर मिशन के तहत मोदी सरकार हर साल अरबों रूपये खर्च कर रही है, लेकिन घोटालेबाज इस मिशन पर भी पलीता लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं। उत्तराखंड में घोटालेबाजों ने सोलर मिशन में करीब सौ करोड़ रूपये की बंदरबांट करने में लगे हुए हैें। मजेदार बात यह है कि राज्य की नई नवेली भाजपाई सरकार आंखों में काली पटटी बांधकर तमाशाई बनी हुई है और भ्रष्ट अफसर मजे लूट रहे हैं।
मोदी सरकार द्वारा ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने के लिए देशभर में बढ़े जोर शोर से सोलर मिशन प्रोग्राम के तहत सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसे सरकार ने सूर्योदय स्वरोजगार योजना नाम दिया है। इस योजना का मकसद जहां सोलर इनर्जी को बढ़ावा देना है, वहीं बेरोजगार युवकों को रोजगार भी उपलब्ध कराना है।

साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पूरे जोरशोर से शुरू की गई इस योजना के तहत उत्तराखंड में करीब 2000 सोलर पाॅवर प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया। 4-5 किलोवाट क्षमता के एक पावर प्लांट की कीमत 3 से 4 लाख रूपये है। योजना के तहत 70 प्रतिशत भारत सरकार, 20 प्रतिशन राज्य सरकार और 10 प्रतिशत लाभार्थी को खर्च करना है।

उत्तराखंड में इस योजना को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा राज्य सरकार की एजेंसी उत्तराखंड अक्षय उर्जा विकास अभिकरण उरेडा को दिया गया। उरेडा ने साल 2016 में योजना के तहत सोलर पावर प्लांट स्थापित करवाने के लिए 6 कंपनियों मैसर्स उजास इनर्जी लि0 इन्दौर, मैसर्स जयसवाल बैटरी सर्विस लि0 लखनउ, मैसर्स मित्तल मशीन लि देहरादून, मैसर्स पावर वन माइक्रो सिस्टम लि0 बैंग्लोर, मेसर्स एडोस रिनेवल प्रालि0 देहरादून और मैस वीजा पावर टेक लिमिटेड मुम्बई के साथ राज्य में 2000 प्लांट स्थापित करने का अनुबंध किया। योजना के तहत कंपनियों को चयनित लाभार्थियों के आवास पर सोलर पैनल लगाकर उससे उत्पादित उर्जा को उत्तराखंड उर्जा निगम की ग्रिड से जोड़ना था। प्लांट लगाने वाली कंपनियों को भुगतान करने से पहले नियमानुसार प्लांट में लगने वाले सोलर पैनल की टेंस्टिंग विभाग द्वारा की जानी थी, लेकिन उरेडा के भ्रष्ट अफसरों ने यह भी जांचने की जरूरत नहीं समझी कि कंपनियों द्वारा लगाए गए सोलर पैनल मानकों के तहत उर्जा का उत्पादन कर रहे हैं या नहीं।घोटोलेबाजों ने बकायदा विधानसभा चुनाव की आड़ लेते हुए अनुबंध की शर्तों को ही बदल डाला। इसके लिए उरेडा के उप मुख्य परियोजना अधिकारी सीपी अग्रवाल ने 31 जनवरी 2017 को चुनाव डयूटी का हवाला देते हुए जनपदीय अधिकारियों को पत्र लिखकर बताया कि योजना के तहत सोलर प्लांट में लगने वाले उपकरणों की गुणवत्ता के निरीक्षण की शर्तों को शिथिल कर दिया गया है। सोलर प्लांट लगाने का काम तकरीबन पचास फीसदी पूरा हो चुका है। योजना पर अब भी काम चल रहा है। कंपनियां भ्रष्ट अफसरों को मोटा कमीशन खिलाकर दोयम दर्जे के सोलर पैनल लगाकर पूरी योजना पर ही पलीता लगा रही हैं।

नियमानुसार एक पावर प्लांट से प्रतिदिन 25 से 30 यूनिट बिजली का उत्पादन होना था, लेकिन उत्पादन औसतन 10 यूनिट से भी कम हो रहा है। जनपद स्तर पर विभागीय अधिकारियों ने उरेडा मुख्यालय में इस खेल को अंजाम देने वाले भ्रष्ट अफसरों की मनमानी पर सवाल भी उठाये, लेकिन न तो शासन में बैठे नौकरशाहों ने इस पर गौर किया और न ही सरकार ने।

रूद्रप्रयाग और अल्मोड़ा के परियोजना अधिकारियों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में इस योजना में कंपनियों द्वारा निम्न गुणवत्ता के सोलर पैनल व अन्य उपकरण लगाए जाने के तथ्य उजागर किए। उरेडा ने बिना जांचे-परखे ही कंपनियों को बिल का बड़ा हिस्सा भुगतान कर डाला है। उरेडा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उरेडा के अफसरों ने कंपनियों से मोटा कमीशन लेकर योजना पर ही पूरी तरह पलीता लगा डाला। समय साक्ष्य को  उरेडा से जुड़े एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि इस योजना के तहत 25 -30 करोड़ रूपये भ्रष्ट अफसरों ने कंपनियों से वसूला जा रहा है। वसूली की यह रकम अफसरों  की जेब में जा रहा है। इस पूरे खेल के कर्ताधर्ता उरेडा के परियोजना अधिकारी सीपी अग्रवाल और मुख्य परियोजना अधिकारी एके त्यागी हैं। उरेडा पहले से ही भ्रष्टाचार और घोटालों के लिए कुख्यात रहा है। इस पूरे खेल में अपने कारनामों को लेकर कुख्यात सचिवालय में बैठा एक नौकरशाह भी शामिल है। सोलर मिशन से जुड़ी दूसरी योजनाओं में भी यही खेल खेला जा रहा है।

अघिकारी ने कहा है कि यदि सोलर मिशन से जुड़ी योजनाओं की सीबीआई जांच हो तो कई अधिकारियों को जेल की हवा खानी पड़ जाएगी। उन्होंने बताया कि सोलर पावर प्लांट जैसी योजनाओं से उत्तराखंड की तस्वीर बदली जा सकती है, लेकिन यहां तो सब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।ऐसे में कोई उम्मीद करना ही बेमानी है।

ग्रीन इनर्जी को बढ़ावा देने के लिए स्थापित उरेडा राज्य में भ्रष्टाचार और घपले-घोटालों को लेकर कुख्यात रहा है। इस एजेंसी पर पहले भी घोटालों के आरोप लगते रहे हैं। समय साक्ष्य ने  इस गड़बड़झाले पर उरेड़ा के अधिकारियों का पक्ष लेने की कोशिश, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया। जैसे ही उरेडा का पक्ष प्राप्त होगा उसे खबर में शामिल कर लिया जाएगा।

चुनाव से पूर्व कांग्रेसी हरीश रावत को भ्रष्टाचार और घोटालों को लेकर आक्रामक मुद्रा में घेरने वाली बीजेपी की त्रिवेन्द्र सरकार अब मोदी के इस सोलर मिशन पर पलीता लगाने वाले भ्रष्टों के खिलाफ कार्रवाई करती है या नहीं, देखना दिलचस्प होगा।

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