उत्तराखंड : 7 समंदर पार से पहुंची विदेशी जोड़ी, गढ़वाली रीति-रिवाज से हुआ शुभ विवाह

उत्तराखंड के परंपरा, संस्कृति और सभ्यता का कोई जवाब नहीं। ये ही वजह है कि काफी लंबे वक्त बाद ही सही लेकिन अब देश-विदेश के लोगों का देवभूमि पर बेशुमार प्यार उमड़ रहा है। प्यार की एक कहानी इटली के स्टेफानो और जूलिया ने लिखी है। इन दोनों को उत्तराखंड की संस्कृति से इतना लगाव है कि दोनों ने अपनी शादी यहीं करने की ठानी। मां गंगा, योग, आध्यात्म और साहसिक पर्यटन के लिए दुनियाभर में मशहूर उत्तरकाशी की धरती एक बार फिर से चर्चा का सबब बन गई। इटली के स्टेफानो पिपिताने और जूलिया कंग्लारियो ने दुनियाभर की आधुनिक चकाचौंध से दूर होकर उत्तरकाशी में पहाड़ी रिती-रिवाज़ से शादी की।  स्टेफानो और जूलिया उत्तरकाशी स्थित योग विद्या गुरुकुल आश्रम में शिष्य हैं। दोनों ने मां गंगा के तट पर अपने दांपत्य जीवन की शुरुआत की। तीन दिनों तक शानदार समारोह चलता रहा और पहले दिन वर-वधू ने गंगोत्री धाम में दर्शन किए। इसके बाद गढ़वाली परंपराओं के साथ मंगल स्नान, मेहंदी और महिला संगीत कार्यक्रम हुआ।  इस समारोह की सबसे खास बात रही ढौल दमाऊं। जी हां ढोल दमाऊं के बीच रातभर रासू और तांदी नृत्य किया गया। इसके बाद तो और भी शानदार नज़ारा देखने को मिला। शुक्रवार की सुबह वर पक्ष के लोग बारात लेकर पहुंचे। लड़की वालों ने बारातियों का स्वागत पारंपरिक गढ़वाली टोपी पहनाकर किया। इसके बाद मंत्रों के उच्चारण और परंपराओं के साथ अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए गए। समारोह के आखिर में वर-वधू ने उत्तरकाशी के काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर बाबा विश्वनाथ से सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना की। वैदिक संस्कारों के मुताबिक वर-वधू का नाम बदलकर अब अनंत शर्मा और लक्ष्मी शर्मा रखा गया है। अब आगे आने वाले जीवन में ये सभी कर्मकांडों में अनंत और लक्ष्मी नाम का ही प्रयोग करेंगे। विवाह के दौरान सभी पुरुषों ने गढ़वाली टोपी के साथ पारंपरिक धोती कुर्ता पहना हुआ था। महिलाओं ने विवाह के दौरान साड़ी पहनी हुई थी। भोजन में झंगोरे की खीर, अरसे, उड़द के दाल की पकोड़ी जैसे गढ़वाली पकवान बनाए गए। केले के पत्ते में चावल परोसे गए। गढ़वाल के मांगल गीत, महिला संगीत और हल्दी समारोह ने इस विवाह में सभी का ध्यान खींचा। ऊपर से ढोल दमाऊं की धुन पर रासों और तांदी नृत्य ने अलग ही माहौल तैयार कर दिया।

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