उत्तराखंड को नए मिजाज के नेता की दरकार

वेद विलास उनियाल

नेता बदलने की फिर चर्चा। कुछ सुगबुगाहट। होना क्या है ये तो अमित शाह के अलावा कोई नहीं जानता। नेता तो नौ बदले। सवाल ढर्रे को बदलने का है।

अगर किसी तरह बदलाव होता है तो नए मिजाज का नेता चाहिए। जिसके पास दृष्टि हो, नई सोच हो। सच्चा संकल्प हो। बार बार की हताशा ठीक नहीं। अनुभव की बात अब बेेमानी सी लगती है। भले किसी नए चेहरे को लाइए। लेकिन राज्य की दशा ठीक कीजिए। यह पर्वतीय राज्य बेहद संवेदनशील स्थिति में है, इसके लिए सोचना पडेगा।

उत्तराखंड सबसे ज्यादा बदनाम इस बात पर हुआ है कि लगभग हर मुख्यमंत्री के समय कुछ खास लोगों का घेरा उनके आसपास रहा।
मुख्यमंत्री खुले दिमाग से राज्य के बारे में नहीं सोच पाए। ईमानदार कहे जाने मुख्यमंत्री को पापा कहने वाले ने भी अपने पोतो के लिए धनदौलत जमा कर दी। इस राज्य को रुलाने में वो आइएएस भी रहा, जिसने मुख्यमंत्री को अपने आगोश में ले लिया। उसकी लूट उत्तराखंड की बर्बादी लिख गया। उसे रोकने वाला कोई नहीं था।

तजुर्बेकार नेताओ से भी गलती हुई कि गलेदारों परम भ्रष्ट को अपने साथ जोडकर राज्य का बंटाधार करवाया। एक मुख्यमंत्री ने पौडी श्रीनगर के बीच रोज चक्कर मारने वाले कुछ छाप लडके साथ में रखकर उनकी सलाह मशवरा को अहमियत दी । इन लडको ने संभावित कुशल नेता को जन जन से दूर करा दिया।

अगर पुराने ही ढर्रे को लेकर नया आएगा तो

1- फिर चंडुखाने से लाकर तीन चार सलाहकार बनाएगा । जो केवल सिफारिशी होंगे। न योग्यता न अनुभव । न किसी तरह की ठोस सामाजिक योगदान। महज सिफारिशी । उनका लाखों का वेतन गरीब जनता पर डालेगा।

2- फिर नौकरशाह अपने से चलाएंगे। जैसे 18 साल से देख रहे हैं।

3- जो माफिया उच्चक ठेकेदार राज्य बनने के पहले दिन से ही सचिवालय मंत्रालय मे नजर आते रहे । सरकार बदली पर ये हमेशा नजर आते रहे। वो आगे भी आएंगे । नया फिर कुछ भ्रष्ट को पने साथ जोडेगा। वही चलता रहेगा। दलालों की हर दिन की पोशाक बदलेगी चरित्र नहीं ।

4- फिजूलखर्ची अय्याशी सैरसपाटा , गलदम सलदम जो अब तक होता रहा वो आगे भी होगा

5- सूचना विभाग की कृपा से ढाई हजार पत्रकार पहले से दून में जमे है। न जाने क्या क्या होता रहा इस महकमें में। भ्रष्टाचार का एवरेस्ट है उत्तराखंड का सूचना विभाग। संस्कृति विभाग इसकी सगी बहन है। दोनो ने मिलकर कचरा किया है उत्तराखंड का। नया नेता अगर इसी ढर्रे का होगा तो क्या कर लेगा। फिर कोई सूफिया गायक करोड की चपत लगाएगा। फिर संस्कृति के नाम पर अनाप शनाप पैसा बंटेगा। लोकसंस्कृति और कमीशन। पदों पर बैठे लोगों की बेशर्मी से अपने सांस्कृतिक दल। कोई पूछने वाला नहीं।
नौ कुछ नहीं कर पाए तो दसवां क्या करेगा। केवल संभव है कुछ मंत्रियों के विभाग बदल जाए कुछ अफसरों के महकमें। पर राज्य की गत तो तभी बदलेगी जब कोई नए मिजाज का होगा। इस पर्वतीय राज्य के स

6 – ऐसा मुख्यमंत्री जो सब्जबाग न दिखाए सीधे कामकाज पर उतर आए। भूल गए है लोग कि ये पर्यटन प्रदेश है या आयुष प्रदेश है या ऊर्जा प्रदेश है ये केवल लूट खसौट का प्रदेश है। इस छोटे राज्य ने देश को दिखाया है कि आदर्श नहीं लूट खसोट की नदियां कैसे बहती है।

7 – नया आकर क्या कर लेगा जब ठानी हो कि गांव को दुदिर्नों में ही रहने दो। गांव को भूतहा होने दो उजाड होने दो। जो भी नेता आए अगर गाव पहाडों से इस कदर नफरत है तो कैसे राज्य के अच्छे दिन आएंगे। जन्मपत्री में ही नहीं लिखा है शायद। बेहाल है ये राज्य। राज्य केवल नेताओ अफसरो ठेकेदारों माफियों के लिए बना। आम लोगों से पूछिए अठारहा साल केवल आसूं ही आंसू। नया आकर क्या करेगा। पांच मिनट की शपथ लेगा। उसके बाद लड्डू बर्फी समोसा चाय। परंपरा के तहत कुछ भूखे पत्रकार टूट पडेंगे। वहां खडे छोटे अफसर कहेंगे लीजिए सर एक मिल्क केक लीजिए। आखिर दो हजार है। कुछ नई जुगाडों को देखेंगे। नए मुखिया के साथ फोटो खिचाएंगे। कुछ बारीकी से देखेंगे कि नए सिस्टम मं कौन विज्ञापन दिलाएगा। कौन कामधेनु बनेगा। कुछ नए नंबर डायरी में नोट होंगे। कुछ नंबर हटाए जाएंगे।

8- नया आएगा और वह ढुलमुल हुआ तो फिर खेमेबाजी। कुछ इधर के कुछ उधर के।

9 – वचनी देवी हो, च्ंद्र सिंह राही हों या कबूतरी देवी,, महज संवेदना जताने की रस्म होगी। जलती चिता के पास कोई नहीं पहुंचेगा। कोई नहीं जानेगा राजेंद्र धस्माना कब गुजर गए। अंत समय में कवि पूरण पथिक कितना लाचार रहे। कोई नेता जीत सिंह नेगीजी के पास जाने का समय नहीं निकालेगा।

सवाल नेता बदलने का नहीं। इस सडी गली व्यवस्था को ध्वस्त करने का है। लोग असहाय है। नेता अफसर और दलालों ने ऐसा शिकंजा कसा है कि उत्तराखंड केवल कराह रहा है ।

NO COMMENTS