खुद के गांव पर खतरा मंडराता देख ग्रामीणों ने बदल डाला नदी का रूख

पिथौरागढ़: चौदास घाटी में काल बनी हिमखोला नदी का रूख बदलने में प्रशासन हील हवाली करता रहा। ग्रामीणों ने खुद के गांव पर खतरा मंडराता देख नदी का रूख खुद ही बदल दिया। प्रशासन की लाचारी के आगे हार मानने के स्थान पर ग्रामीणों ने खुद बीड़ा उठाया। गांव को लीलने को आ रही नदी का प्रवाह बदल दिया है। वह भी तब जब नदी पूरे उफान पर है और गांव के तीन लोगों को लील चुकी है।

बीते दिनों की भारी वर्षा से हिमानी नदी हिमखोला ने विकराल रूप ले लिया था। इस नदी में गांव के तीन लोग बह गए थे। जिसमें अभी तक केवल दो के ही शव मिले हैं। नदी ने तबाही मचाते हुए हेमा देवी पत्नी टेसू राम का मकान बहा दिया था। गोपाल राम, सुरेश राम, रामशंकर, राजेंद्र राम के मकान मलबे से भर गए थे। अनुसूचित जाति के 18 परिवार पिछले 13 दिनों से पंचायत घर और आंगनबाड़ी केंद्र में शरण लिए हुए हैं।

हिमखोला नदी में चार आरसीसी पुल बहने से गांव के नम्फूकांग, खालू, चरज्याकंग और युन्कू तोकों का आपस में सम्पर्क भंग है। जान जोखिम में डालकर ग्रामीण नदी पार कर रहे हैं। गांव की आलू और राजमा की खेती की दो सौ नाली भूमि हिमखोला ने निगल ली है।

लगातार भू कटाव जारी है। नदी का प्रवाह बस्तियों के करीब तक पहुंच चुका है। प्रशासन द्वारा अभी तक गांव में हुई क्षति का आंकलन तक नहीं किया गया है। ग्रामीण लगातार जेसीबी मशीन और पौकलैंड मशीन लगाकर नदी का रूख बदलने की मांग करते आ रहे हैं।

ग्राम प्रधान रश्मि देवी और बीडीसी सदस्य पुष्कर कुमार द्वारा गिर रहे बिजली के पोलों को रस्सियों से बांध कर गांव में अनहोनी रोकी है। तवाघाट- नारायण आश्रम मोटर मार्ग कंच्योती से नारायणआश्रम तक जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। जिसके चलते गांव तक खाद्यान्न सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पिछले 14 दिनों से नहीं हुई है।

प्रशासन गांव की वेदना को दूर करने में प्रकृति के आगे लाचार साबित हुआ। जिसे देखते हुए आपदा झेल रहे ग्रामीणों ने अपने सीमित साधनों के माध्यम से पूरे दिन जान जोखिम में डालकर विकराल बनी हिमखोला नदी का रूख बदल कर प्रशासन को आइना दिखाया है।

ग्रामीणों के इस प्रयास को देखकर आसपास के गांवों के लोग भी चकित हैं। साठ डिग्री के कोण में बहने वाली वेगवती नदी का रूख ग्रामीणो ने दूसरी तरफ कर गांव को बचा लिया है।

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