बदलेगे दिन पहाड़ के

लगातार हो रहे खाली गांव बयां कर रहे है कि पलायन थमने के वजाय बड़ रहा है ये बात अलग है कि नेता, अभिनेता, कलाकार, पत्रकार, गीतकार, साहित्यकार आदि ने पलायन की पीडा को बयां किया है। जमीनी हकिकत ठोक बजाकर बता रही है कि पहाड़ से पलायन रोकने की सरकारी नितियां, योजनायें और परियोजनायें या तो फाइलों से बाहर नहीं निकली या फिर इनके अमल में चूक या खामियां रही हैं। बहारहाल, एक बार फिर से उत्तराखण्ड में पलायन की चिंता भी हो रही है और इसे रोकने की पहल भी। इसी के चलते देहरादून में श्री रत्नेष्वर जनकल्याण समिति की बैठक में पलायन पर विचारों का मंथन हुआ। वक्ताओं ने पलायन के कारण व निवारण पर अपने-अपने विचार रखे।
बैठक मुख्य रूप से इस ध्येय से आयोजित की गयी थी की हम अपने गावों को वीरान होने से कैसे बाचायें बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में ‘पलायन एक चिंतन’ टीम के अखिलेश डिमरी ने कहा की सर्वप्रथम हम लोग अपने गांवों में जायें वहाॅ के लोगों की आज की परिस्थितियों को समझें। उन्होंने सुझाव दिया कि पलायन को रोकने के लिये त्वरित उपाय यह है कि हम अपने गाॅव को पर्यटन गतिविधियों से जोड़े। होम स्टे का कान्सेप्ट अपनायें। उन्होने ‘पलायन एक चिंतन’ की ओर से प्रस्ताव दिया कि 51 प्रतिशत हिस्सेदारी पर हम ‘होमस्टे’ लाभांष का वितरण कर सकते हैं यदि गाॅव ‘होमस्टे’ के लिये तैय्यार हो जायें।
सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त देवी प्रसाद सेमवाल ने कहा कि जरूरी है की हम सरकार पर निर्भर न रहकर स्वयं पहल करें। अपने घर-गाॅव जायें टूटे, जर्जर होते भवनों को खड़ा करें। बैठक में मैती अन्दोलन के संस्थापक कल्याण सिंह रावत ने पलायन का दर्द तो साझा किया साथ ही उसे रोकने के ठोस उपाय भी सामने रखे उन्होनें कहा  शिक्षा, स्वास्थ्य पेयजल की बुनियादी जरूरतें पूरी किये बिना पलायन नहीं रोका जा सकता। जो लोग शहरों में बस चुके हैं वे अपनी आय का कुछ-कुछ अंश जरूर गाॅंव के सामूहिक विकास के लिये दें। टूरिज्म को बढ़ावा दें। सुभाष रतूड़ी ने पलायन पर कविता सुनाकर उपस्थित लोगों को गांव की याद दिला दी। यहाॅ उपस्थित सभी लोगों में वीरान होते गावों का दर्द था तो साथ ही अब एकजुट होकर कुछ करने का संकल्प भी। बैठक में देहरादून के साथ दिल्ली से आये युवाओं ने भी भागीदारी की। इस मौके पर डाॅ0 एस0पी0 कण्डवाल, विनोद रतूड़ी, डाॅ0 सुनील डिमरी, शम्भू प्रसाद रतूड़ी, उद्वव कण्ड़वाल, अरूण रतूड़ी, मुकेश सेमवाल ने भी अपने सुझाव और चिंताये व्यक्त की। कार्यक्रम में प्रेम बल्लभ रतूड़ी, दिनेश  मलगुड़ी, उमेश  रावत, सतीश  रतूड़ी, अजय रतूड़ी, प्रेम डूड़ी, द्वारिका प्रसाद चमोली, अजय रतूड़ी, कैलाश  रतूड़ी आदि उपस्थित थे।

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